दिशा सालियान केस की FIR कॉपी सीलबंद लिफाफे में जाएगी
September 15, 2026
दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आधिकारिक तौर पर प्राथमिकी यानी एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के 2 सितंबर 2026 के निर्देश के बाद हुई है. सीबीआई ने 13 सितंबर को मामले में एफआईआर दर्ज की. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सीबीआई को दिशा के पिता सतीश सालियन की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच करने का निर्देश दिया था. साथ ही कोर्ट ने साफ किया था कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री सामने आने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाएगा.
सीबीआई ने यह कार्रवाई दिशा के पिता सतीश ईश्वर सालियन के बयान के आधार पर की है. सतीश सालियन का बयान 11 सितंबर 2026 को दर्ज किया गया था. एफआईआर में फिलहाल किसी व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है. एजेंसी ने अज्ञात आरोपियों और संदिग्धों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. हालांकि, मीडिया रिपोर्टों में एफआईआर में कुछ चर्चित लोगों के नाम का उल्लेख होने का दावा किया गया है, लेकिन जांच के इस चरण में किसी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा.
सीबीआई की ओर से दर्ज प्राथमिकी का नंबर RC0502026S0006 बताया गया है. इसमें आपराधिक साजिश के लिए आईपीसी की धारा 120-बी, सामूहिक दुष्कर्म के लिए धारा 376-डी, हत्या के लिए धारा 302, साक्ष्य मिटाने या झूठी जानकारी देने के लिए धारा 201 और लोक सेवकों की ओर से कानून की अवहेलना तथा गलत रिकॉर्ड तैयार करने से जुड़ी धाराएं 217 और 218 शामिल हैं. इन धाराओं के आधार पर सीबीआई अब यह जांच करेगी कि दिशा सालियान की मौत के पीछे वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं और क्या मामले में हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, साजिश या सबूतों से छेड़छाड़ जैसे अपराध हुए थे.
दिशा के पिता सतीश सालियन ने अपने बयान में दावा किया है कि 8-9 जून 2020 की दरमियानी रात हुई उनकी बेटी की मौत आत्महत्या नहीं थी, बल्कि इसके पीछे गहरी साजिश थी. उनका आरोप है कि दिशा के पास कुछ संवेदनशील जानकारियां थीं, जिन्हें वह और सुशांत सिंह राजपूत सार्वजनिक करने वाले थे.
सतीश सालियन ने मुंबई पुलिस की शुरुआती जांच पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि उन्हें लंबे समय तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी गई और कई कागजों पर बिना पूरी जानकारी दिए उनसे हस्ताक्षर कराए गए. उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट और फॉरेंसिक नमूनों यानी स्वाब में कथित बदलाव, सीसीटीवी फुटेज और लोकेशन डेटा गायब किए जाने के भी आरोप लगाए हैं.
इससे पहले मुंबई पुलिस ने मामले को आकस्मिक मौत की रिपोर्ट के तौर पर दर्ज किया था और जांच में इसे आत्महत्या माना गया था. बाद में राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल ने भी मौत में किसी तरह की साजिश नहीं पाए जाने की बात कही थी. अब हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई नए सिरे से मामले की जांच कर रही है.
जांच शुरू करने के साथ ही सीबीआई ने मालवानी पुलिस स्टेशन और मुंबई पुलिस से दिशा सालियान की मौत से जुड़े सभी मूल दस्तावेज मांगे हैं. इनमें आकस्मिक मौत की रिपोर्ट (ADR No. 85/2020), पोस्टमार्टम रिपोर्ट, केस डायरी और अन्य डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं. सीबीआई अब इन दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा जांच करेगी. एजेंसी घटनास्थल, तकनीकी साक्ष्य और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि दिशा की मौत के मामले में वास्तव में कोई आपराधिक साजिश या अन्य अपराध हुआ था या नहीं.
सीबीआई की दर्ज एफआईआर की प्रति मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष सीलबंद लिफाफे में पेश किए जाने की बात सामने आई है. मामले की आगे की जांच हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार होगी. जांच की जिम्मेदारी सीबीआई के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) पूरन कुमार को सौंपी गई है.
