संग्रामपुरः यूरिया के लिए गोरखापुर समिति पर लगी किसानों की कतार
September 01, 2026
संग्रामपुर/अमेठी। जिले में खाद की पर्याप्त उपलब्धता के दावों के बीच विकासखंड संग्रामपुर क्षेत्र की सहकारी समिति गोरखापुर केंद्र पर मंगलवार को यूरिया खाद लेने के लिए किसानों की लंबी कतार लगी रही। सुबह से ही बड़ी संख्या में किसान यूरिया लेने के लिए समिति केंद्र पहुंच गए। खाद लेने के इंतजार में किसानों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा। करीब दो घंटे इंतजार के बाद जब बारिश शुरू हुई तो किसानों की परेशानी और बढ़ गई। बारिश के बावजूद किसान यूरिया लेने के लिए कतार में डटे रहे।किसानों का कहना है कि मानसून के दौरान फसलों में यूरिया की आवश्यकता सबसे अधिक होती है। धान सहित अन्य फसलों में इस समय यूरिया का छिड़काव जरूरी है, जिसके चलते किसान सहकारी समिति के केंद्रों का रुख कर रहे हैं। गोरखापुर समिति पर भी आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान यूरिया लेने पहुंचे थे। लेकिन वितरण प्रक्रिया में देरी के कारण किसानों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।बारिश के बीच कतार में खड़े किसानों ने बताया कि खेती का काम छोड़कर खाद लेने के लिए समिति पर आना पड़ रहा है। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाद मिलने में देरी होने से समय और मेहनत दोनों बर्बाद हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि केंद्र पर पर्याप्त व्यवस्था और सुचारु वितरण की व्यवस्था हो तो उन्हें इतनी देर तक परेशान नहीं होना पड़ेगा।कुछ किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों के उस दावे पर भी सवाल उठाए, जिसमें जिले में यूरिया का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है तो समितियों पर लंबी कतारें क्यों लग रही हैं और किसानों को घंटों इंतजार क्यों करना पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि सहकारी समितियों पर यूरिया वितरण की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए। केंद्रों पर किसानों की संख्या के अनुसार पर्याप्त कर्मचारी लगाए जाएं और खाद वितरण में अनावश्यक देरी न हो। किसानों का कहना है कि समय पर यूरिया नहीं मिलने से फसलों के उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, बारिश के बीच यूरिया के लिए घंटों कतार में खड़े किसानों की तस्वीर ने खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि उन्हें समय पर और आसानी से यूरिया उपलब्ध कराया जाए, ताकि खेती-किसानी प्रभावित न हो।
