जगदीशपुर: सरकारी पेड़ों पर वन माफिया का कुल्हाड़ा, पुलिस जांच में जुटी
September 06, 2026
जगदीशपुर/अमेठी। वन माफियाओं के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वारिसगंज रेलवे स्टेशन के किनारे लगे सरकारी सागौन के दो पेड़ों को अज्ञात लकड़कटों ने रातोंरात काट डाला। पेड़ों को काटने के बाद लकड़ी को भी मौके से ठिकाने लगा दिया गया। सुबह घटना की जानकारी होने पर इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना पर रेलवे पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तथा घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच-पड़ताल शुरू कर दी। मामला थाना भाले सुल्तान शहीद स्मारक क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। बताया जाता है कि वारिसगंज रेलवे स्टेशन के किनारे सागौन के दो पेड़ खड़े थे। अज्ञात लोगों ने रात के अंधेरे में पेड़ों को काटकर उनकी लकड़ी वहां से गायब कर दी। सुबह जब लोगों की नजर कटे हुए पेड़ों पर पड़ी तो इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दी गई। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। टीम ने आसपास के लोगों से भी घटना के संबंध में जानकारी जुटाई। हालांकि समाचार लिखे जाने तक पेड़ काटने वाले आरोपियों का कोई सुराग नहीं लग सका था। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस स्थान पर सरकारी पेड़ों की कटान की घटना हुई है, वह थाना परिसर से कुछ ही दूरी पर बताया जा रहा है। ऐसे में रात के समय हुई इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि यदि मुख्य मार्ग और थाना क्षेत्र के आसपास से ही सरकारी पेड़ सुरक्षित नहीं हैं तो दूरदराज के इलाकों में वन संपदा की सुरक्षा किस तरह हो रही होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग और पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कराकर पेड़ काटने वालों की पहचान करने तथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी लकड़ी कटान की घटना के बाद लकड़ी को मौके से हटाकर ले जाने तक संबंधित जिम्मेदारों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी मुसाफिरखाना ने बताया कि मामला रेलवे विभाग से संबंधित है। फिलहाल मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है। वहीं स्थानीय पुलिस का कहना है कि अभी तक घटना के संबंध में कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। तहरीर मिलने के बाद नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
