Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया, हिंदू संगठन के लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन


बीते कुछ समय से सोशल मीडिया से चर्चा में आए स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर एक बड़ी खबर है। उसे एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है। उसे कड़कड़डूमा कोर्ट कॉम्प्लेक्स में संबंधित जज के आवास पर पेश किया गया था। बता दें कि यह मामला मारपीट की उस घटना से जुड़ा है, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज ने 14 साल के CJP एक्टिविस्ट के पिता संजय आजाद के साथ मारपीट की थी।

दरअसल स्वतंत्र भारद्वाज को पुलिस कस्टडी में भेजे जाने से पहले ही से हिंदू संगठन के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये प्रोटेस्ट दिल्ली के उसी पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर हो रहा था, जहां शुक्रवार को सीजेपी वालों ने प्रोटेस्ट किया था।

बड़ी संख्या में हिंदुवादी थाने के बाहर जुटे हैं और स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने की सुरक्षा टाइट कर दी गई और बड़ी संख्या में थाने के बाहर फोर्स तैनात है।

दरअसल शुक्रवार को सीजेपी और यूथ कांग्रेस के धरना प्रदर्शन के बाद पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने जंतर-मंतर पर संजय कुमार के साथ मारपीट करने के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ दी थीं, साथ ही एक नई शिकायत के आधार पर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ POCSO एक्ट में नई FIR दर्ज की गई है क्योंकि पीड़िता नाबालिग है।

निशु आजाद और स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर दलित वोट की सियासत भी शुरू हो गई है। राहुल गांधी से लेकर चंद्रशेखर और चिराग पासवान तक, सब इस मामले में एक्टिव हैं। दरअसल पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया था कि उसके ऊपर बीजेपी नेताओं का हाथ है, यही वजह है कि दिल्ली पुलिस स्वंतत्र भारद्वाज के खिलाफ एक्शन लेने से बच रही थी।

बीजेपी नेताओं के साथ स्वतंत्र भारद्वाज की कई तस्वीरें भी सामने आई हैं। कांग्रेस के हैंडल से इन तस्वीरों को जमकर शेयर किया जा रहा है। इस बीच चिराग पासवान ने स्वतंत्र के दावे को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि वो निशु आजाद के साथ हैं, उनका स्वतंत्र भारद्वाज से कोई लेना देना नहीं है।

स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किल उसके बड़बोलेपन से बढ़ी हैं, जिसमें उसने खुलेआम कबूल किया कि उसने संजय आजाद को मारा और दावा किया कि कपिल मिश्रा का फोन आया। इसीलिए वो जेल में भी नहीं गया। यही बड़बोलापन स्वतंत्र भारद्वाज के लिए मुसीबत बन गया और बीजेपी की सियासत लिए भी।

हल्द्वानी में शुद्धिकरण वाले विवाद को कांग्रेस हवा दे रही थी। उसमें स्वतंत्र भारद्वाज के इस बयान ने और दलित वोट में उम्मीद तलाश रही कांग्रेस को मौका दे दिया है जो विवाद सिर्फ राइट विंग के इन्फ्लुएंसर और लेफ्ट विंग इन्फ्लुएसर के बीच में था, वो विवाद दलित बनाम सवर्ण हो गया है।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |