Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

लखनऊः सहकार भारती का दो दिवसीय अभ्यास वर्ग गरिमामयी वातावरण में संपन्न!सहकारिता ही पूंजी वितरण और बेरोजगारी की समस्या का समाधान- मनोज कांत


  • एस.आर. इंस्टीट्यूट में सहकार भारती का दो दिवसीय अभ्यास वर्ग संपन्न
  • भारतीय संस्कृति और परंपराओं में रचा-बसा है सहकारिता का भाव- राजदत्त पांडेय
  • स्वावलंबी भारत अभियान से गांव-गांव स्थापित होंगे स्व-उद्यम- अशोक कुमार शुक्ला

लखनऊ। सीतापुर रोड स्थित एस.आर. इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित सहकार भारती का दो दिवसीय अभ्यास वर्ग सोमवार को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि श्राष्ट्रधर्मश् के निदेशक मनोज कांत रहे, जबकि अध्यक्षता सहकार भारती के पदाधिकारियों ने की।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि मनोज कांत ने कहा कि सबको एक साथ रखना, साथ मिलकर कार्य करना और सभी को अपना मानकर आगे बढ़ना ही वास्तविक सहकारिता है। वर्तमान दौर में पूंजी के न्यायसंगत वितरण और बेरोजगारी जैसी गंभीर चुनौतियों का समाधान केवल सहकारिता के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा, ष्हमारे इतिहास और शास्त्रों में श्बेरोजगारश् शब्द नहीं था। पाश्चात्य संस्कृति और आधुनिकीकरण के प्रभाव से हमारी भाषा और व्यवहार प्रभावित हुए हैं। ऐसे में सहकारिता हमारी प्राचीन संस्कृति, अनुशासन और भारतीयता के भाव को जीवंत रखने का एकमात्र मार्ग है। भविष्य में सहकारिता का कोई विकल्प नहीं है, इससे जुड़ने वाला व्यक्ति अनुशासित होकर समाज को स्वावलंबन की ओर ले जाता है।

सहकार भारती के प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे ने बताया कि अभ्यास वर्ग के अंतिम दिन तीन महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए। इनमें सहकारिता का इतिहास, प्रकोष्ठ कार्य, सहकारी समितियों का गठन और संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण पर चर्चा हुई। विभाग संयोजक रामकुमार दीक्षित ने विभाग का संगठनात्मक वृत्त प्रस्तुत किया।

श्री दुबे ने जोर देकर कहा कि ईमानदारी और परस्पर सहयोग से कार्य करने से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की क्षमताओं में वृद्धि होती है। उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए विभिन्न प्रकोष्ठों की कार्यशैली और समितियों के गठन की आवश्यकता पर बल दिया।

श्सहकारिता का इतिहासश् विषय पर बोलते हुए सहकार भारती के राष्ट्रीय प्रमुख (पैक्स प्रकोष्ठ) राजदत्त पांडेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मानव विकास का सहकारिता से सदियों पुराना संबंध है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और बिना परस्पर सहयोग के उसका सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।

उन्होंने बताया कि 1904 में देश का पहला सहकारिता कानून बना और महाराष्ट्र के झूले गांव में आज भी देश की पहली सहकारी समिति का रिकॉर्ड दर्ज है। कॉर्पोरेट जगत पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट में पूंजी के आधार पर अधिकार तय होते हैं, जबकि सहकारिता समिति में हर सदस्य को समान अधिकार प्राप्त होता है। संगठन के आर्थिक स्वावलंबन और सामाजिक समरसता के लिए प्रकोष्ठों की मजबूती अनिवार्य है।

सप्तम सत्र में श्स्वावलंबी भारत अभियानश् पर अपने विचार रखते हुए प्रदेश संपर्क प्रमुख अशोक कुमार शुक्ला ने कार्यकर्ताओं को लघु उद्योगों के संचालन, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से जुड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि इस अभियान के माध्यम से गांव-गांव तक युवाओं के साथ-साथ महिलाएं भी स्व-उद्यम स्थापित कर आत्मनिर्भर बनेंगी।

कार्यक्रम का समापन विभाग प्रमुख राम कुमार दीक्षित द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। अभ्यास वर्ग में प्रदेश भर से आए सैकड़ों कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने सहभागिता की।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |