पीलीभीत। सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम बरहा में करीब छह दशक से आवागमन में इस्तेमाल हो रहे रास्ते को कथित तौर पर दीवार खड़ी कर बंद किए जाने के विरोध में बुधवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण कलक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी को शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा। ग्रामीणों ने पुराने रास्ते को तत्काल खुलवाने, संबंधित गाटा संख्या की पैमाइश कराने और कथित अतिक्रमण हटाने की मांग की।ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम बरहा, परगना एवं तहसील सदर स्थित संबंधित मार्ग राजस्व अभिलेखों में रास्ते के रूप में दर्ज है। कालोनी बरहा के लोग वर्षों से इसी रास्ते से आवागमन करते चले आ रहे हैं। आरोप है कि भवानी प्रसाद पुत्र बुद्धसेन निवासी ग्राम बरहा ने करीब 60 वर्षों से प्रचलित खड़ंजायुक्त रास्ते पर दीवार खड़ी कर उसे बंद कर दिया। ग्रामीणों के मुताबिक दीवार के निर्माण के साथ लिंटर भी डलवाया गया है, जिससे उनका आवागमन प्रभावित हो गया है।
प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस रास्ते पर वर्षों पहले दो बार खड़ंजा डाला गया, वहां पानी की पाइप लाइन, केबल और विद्युत लाइन जैसी सरकारी सुविधाएं भी मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी प्रशासनिक आदेश और बिना किसी न्यायालय के आदेश के रास्ते को बंद कर दीवार खड़ी कर दी गई।
उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं और सरकारी निधि से इस रास्ते पर लंबे समय से विकास कार्य कराए गए हैं। 11 केवी और 33 केवी विद्युत व्यवस्था से जुड़ी लाइनें, पानी की पाइप लाइन और अन्य सुविधाएं इस मार्ग से होकर गुजर रही हैं। हजारों मकानों में रहने वाले लोग वर्षों से इसी रास्ते का इस्तेमाल करते आए हैं। ऐसे में अचानक रास्ता बंद होने से लोगों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि ग्रामीणों में यह चर्चा है कि रास्ता बंद करने वाला व्यक्ति भाजपा का बूथ अध्यक्ष है। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी राजनीतिक पद से जुड़े व्यक्ति के दबाव में कार्रवाई हो रही है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कहीं न कहीं प्रशासन भाजपा के एजेंट के रूप में काम करता हुआ नजर आ रहा है। हालांकि, यह आरोप पूर्व मंत्री ने लगाया है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने ग्रामीणों की ओर से यह भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों द्वारा उन्हें यह बताया गया कि यदि वे करीब 45 लाख रुपये एकत्र कर संबंधित व्यक्ति को मुआवजा दे दें, तो रास्ते की समस्या का समाधान हो सकता है।इस पर हेमराज वर्मा ने सवाल किया कि गरीब ग्रामीण आखिर इतने रुपये कहां से लाएंगे? उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि “क्या गांव वाले अपनी किडनी बेचकर 45 लाख रुपये जुटाएंगे?” इस बात को लेकर ग्रामीणों में भी खासा आक्रोश दिखाई दिया।शिकायती प्रार्थना पत्र में ग्रामीणों ने ग्राम बरहा की पैमाइश कराकर मौके की स्थिति स्पष्ट कराने की मांग की है। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित मार्ग करीब 60 वर्षों से सार्वजनिक आवागमन में इस्तेमाल होता रहा है और इसी रास्ते से क्षेत्र के हजारों लोग अपने घरों तक पहुंचते हैं।शिकायत में यह भी कहा गया है कंपोजिट विद्यालय के पीछे करीब 400 गज भूमि शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई थी, जिस पर भवानी प्रसाद के काबिज होने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच कराने तथा वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की।
ग्रामीणों ने कहा कि उनका निवास और आवागमन मुख्य रूप से इसी रास्ते पर निर्भर है। यदि मार्ग पर बनी दीवार नहीं हटाई गई तो उनके घरों का निकास प्रभावित हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से तत्काल मौके की पैमाइश कराकर रास्ते की स्थिति स्पष्ट करने, अवरोध हटाने और आवागमन बहाल कराने की मांग की।प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द समस्या का समाधान नहीं किया और रास्ता नहीं खुलवाया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने भी कहा कि ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।फिलहाल पूरे मामले में ग्रामीणों के आरोप और पूर्व मंत्री के बयान सामने आए हैं। प्रशासन की ओर से आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
