लंभुआ/सुलतानपुर। विकासखंड लंभुआ की ग्राम पंचायत घाटमपुर उत्तरी में मनरेगा के तहत कराए गए इंटरलॉकिंग कार्य को लेकर लोकपाल, विकसित भारत-जीरामजी की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। लोकपाल महेंद्र विक्रम सिंह ने रजितराम यादव के घर से एससी बस्ती होते हुए परमजीत यादव के घर तक कराए गए इंटरलॉकिंग कार्य को ठेकेदारी प्रथा से कराया जाना शिकायत के इस बिंदु को सही पाया है। आदेश में इस कार्य पर खर्च हुई 10 लाख 71 हजार 109 रुपये की पूरी धनराशि वसूली योग्य बताते हुए जिलाधिकारीध्जिला कार्यक्रम समन्वयक, सुलतानपुर से मनरेगा अधिनियम के प्रावधानों के तहत वसूली कराने की अनुशंसा की गई है।लोकपाल कार्यालय के आदेश के मुताबिक ग्राम पंचायत निवासी सुशील दूबे उर्फ विपिन दूबे ने एक जुलाई 2026 को शपथपत्र के साथ शिकायत देकर ग्राम प्रधान, उनके पति तथा संबंधित कर्मचारियों पर सरकारी धन के दुरुपयोग समेत कई आरोप लगाए थे। शिकायत की जांच के लिए खंड विकास अधिकारी लंभुआ से अभिलेख और जांच आख्या मांगी गई, लेकिन कई अवसर दिए जाने के बावजूद अपेक्षित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए।जांच के दौरान वर्तमान सचिव फैयाज खान ने लिखित रूप से बताया कि मनरेगा से संबंधित पत्रावलियां और ग्राम पंचायत के सात रजिस्टर उन्हें चार्ज में उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। बाद की सुनवाई में सचिव की ओर से यह भी बताया गया कि 28 जुलाई को प्रधान पति अशोक कुमार त्रिपाठी से पांच पत्रावलियां प्राप्त हुईं। लोकपाल के आदेश में इस तथ्य को अभिलेखों के संरक्षण और जांच में सहयोग से जोड़कर गंभीरता से दर्ज किया गया है।
आदेश में कहा गया है कि शिकायत के बाद लगभग सात सप्ताह तक विपक्षी पक्ष को पर्याप्त अवसर दिए गए, लेकिन शिकायत से संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों, एमआईएस पोर्टल के आंकड़ों, मस्टररोल विवरण और भुवन पोर्टल पर दर्ज कार्य के प्रारंभ एवं समाप्ति से संबंधित फोटोग्राफ का मिलान किया गया। इसी आधार पर संबंधित इंटरलॉकिंग कार्य में मनरेगा जॉबकार्डधारक श्रमिकों से कार्य कराने के बजाय ठेकेदारी प्रथा अपनाए जाने की शिकायत सही पाई गई।
शिकायत में प्रधानमंत्री आवास योजना में अपात्र लोगों को लाभ दिए जाने तथा ग्रामसभा की खुली बैठक कराए बिना कार्ययोजना तैयार करने के आरोप भी लगाए गए थे। लोकपाल ने ग्रामसभा के रजिस्टर उपलब्ध न होने के कारण इन बिंदुओं पर अंतिम निष्कर्ष देना संभव नहीं माना। वहीं आवास पात्रता सूची की पारदर्शी जांच जनपद स्तरीय समिति से कराने और नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
’नागरिक सूचना बोर्ड के संबंध में भी शिकायत की गई थी। आदेश के अनुसार बोर्ड की आपूर्ति फर्म द्वारा किए जाने के कारण खंड विकास अधिकारी स्तर से उसका भुगतान नहीं किया गया’।
लोकपाल ने सरकारी अभिलेख जांच के लिए उपलब्ध न कराने को जांच में असहयोग और जांच को प्रभावित करने वाला कृत्य माना है। साथ ही महिला ग्राम प्रधान की ओर से स्वयं बैठकों में प्रतिभाग किए जाने संबंधी शासनादेश की अवहेलना करते हुए प्रधान पति के सुनवाई में प्रतिभाग करने तथा सरकारी अभिलेखों के संबंध में भी प्रधान और उनके पति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा जिलाधिकारी से की गई है।
लोकपाल कार्यालय ने आदेश की प्रतियां आयुक्त ग्राम्य विकास, जिलाधिकारीध्जिला कार्यक्रम समन्वयक सुलतानपुर, परियोजना निदेशक डीआरडीए, उपायुक्त श्रम रोजगार तथा खंड विकास अधिकारी लंभुआ को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी हैं।
