बभनी (सोनभद्र)। जनपद सोनभद्र के बभनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। अस्पताल परिसर में मरीजों को वितरित की जाने वाली सरकारी दवाएं खुले में फेंकी हुई मिलीं, जिनका वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। घटना सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अस्पताल परिसर के एक हिस्से में बड़ी मात्रा में दवाएं जमीन पर बिखरी पड़ी थीं। इनमें विभिन्न प्रकार की टैबलेट, कैप्सूल और अन्य औषधियां शामिल बताई जा रही हैं। वायरल तस्वीरों में स्पष्ट रूप से दवाओं के पत्ते और पैकेट खुले में पड़े दिखाई दे रहे हैं। यह वही दवाएं हैं जो सरकारी अस्पतालों में मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी धन से खरीदी गई दवाओं को इस तरह खुले में फेंकना न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि यह मरीजों के स्वास्थ्य और सरकारी व्यवस्था दोनों के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि दवाएं उपयोग योग्य थीं तो उन्हें फेंका क्यों गया और यदि उनकी समयावधि समाप्त हो चुकी थी तो उनके वैज्ञानिक एवं नियमानुसार निस्तारण की प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया।
मामले के सामने आने के बाद क्षेत्रीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दवाओं के भंडारण, वितरण और निस्तारण से जुड़े अभिलेखों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय की जानी चाहिए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि दवाएं अस्पताल परिसर तक कैसे पहुंचीं और उन्हें किसके निर्देश पर वहां फेंका गया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की अनियमितताओं पर अंकुश नहीं लगाया गया तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
