लखनऊ। राजधानी के गोमती नगर स्थित विकल्प खंड-2 से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सार्वजनिक पार्कों के रख-रखाव, उनके संरक्षण और नागरिक अधिकारों पर बहस छेड़ दी है। सार्वजनिक पार्क को हरा-भरा बनाने के एक प्रयास को न केवल रोका गया, बल्कि लगाए गए पौधे को उखाड़ भी फेंका गया। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है और त्ॅ। (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) व संरक्षण के नाम पर पार्कों पर श्निजी कब्जाश् जमाने वाले समूहों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
घटनाक्रम अनुसार 1 अगस्त 2026 की शाम विकल्प खंड-2 निवासी अर्पित श्रीवास्तव अपनी पत्नी और 4 वर्ष की बेटी के साथ श्स्वामी विवेकानंद पार्कश् में एक बरगद का पौधा लगाने गए थे। अर्पित के अनुसार, एलडीए के स्वीकृत लेआउट में यह पार्क पूरी तरह से सार्वजनिक घोषित है। पौधा रोपते समय ही कुछ स्थानीय लोगों और तथाकथित पार्क संरक्षकों ने उन्हें रोकते हुए दावा किया कि सार्वजनिक पार्क में अपनी मर्जी से पौधा लगाना श्अवैधश् है।अर्पित ने इस रोक-टोक की लिखित शिकायत संबंधित अधिकारियों से की। इसके बावजूद, अगले ही दिन (2 अगस्त को) लगाए गए बरगद के पौधे को उखाड़कर फेंक दिया गया। पीड़ित नागरिक ने शिकायत पत्र के साथ पौधा उखाड़े जाने की वीडियो फुटेज भी अधिकारियों को सौंपी है।
लखनऊ के विभिन्न इलाकों में अक्सर यह देखा जा रहा है कि पार्कों के सौंदर्यीकरण या रख-रखाव का जिम्मा उठाने वाले लोग या स्थानीय समूह धीरे-धीरे सार्वजनिक पार्क को अपना ष्पर्सनल गार्डनष् समझने लगते हैं।
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या पार्क में कौन आएगा, कौन सा पौधा लगेगा और कौन नहीं आएगाकृइसका फैसला कोई व्यक्तिगत समूह कर सकता है? पर्यावरण संरक्षण जैसे पुनीत कार्य पर रोक लगाने और लगाए गए पौधे को उखाड़ने का अधिकार किसी त्ॅ। या निजी समूह को किस कानून के तहत मिला है?
लखनऊ विकास प्राधिकरण और लखनऊ नगर निगम के नियमों के अनुसार, पार्क आम जनता के उपयोग के लिए बनाए गए हैं। किसी भी त्ॅ। या स्थानीय समूह को सार्वजनिक भूमि पर मनमाना नियंत्रण करने या अन्य नागरिकों को पर्यावरण हितैषी गतिविधियों से रोकने का विधिक अधिकार नहीं है। सरकारी नीतियां सार्वजनिक स्थलों पर पौधरोपण और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देने की बात करती हैं, न कि उसे हतोत्साहित करने की।
पीड़ित निवासी अर्पित श्रीवास्तव ने स्थानीय पार्षद, लखनऊ नगर निगम और एलडीए के उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
स्थानीय निवासियों की प्रमुख मांगें है कि पौधा उखाड़ने और दबंगई दिखाने वाले दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।सार्वजनिक पार्कों को श्निजी लॉनश् की तरह चलाने वाले समूहों पर नकेल कसी जाए।अधिकारियों द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि सार्वजनिक भूमि सुरक्षित रहे और आम नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के उनके अधिकारों से वंचित न किया जाए।
