लखनऊ: रसोई के गीले कचरे और गोबर से बनेगी गैस और प्राकृतिक खाद
August 03, 2026
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के मॉडल बायोगैस ग्राम और आधुनिक गौशाला अभियान को निजी क्षेत्र का भी सहयोग मिलने लगा है। जल प्रबंधन समाधान उपलब्ध कराने वाली कंपनी सिंटेक्स ने अपने फ्लोटिंग टाइप बायोगैस प्लांट के जरिए सरकार की इस पहल में तकनीकी सहयोग देने की घोषणा की है। कंपनी का कहना है कि इससे गांवों में स्वच्छ ऊर्जा, बेहतर कचरा प्रबंधन और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा।सिंटेक्स के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 100 किलोग्राम गोबर और रसोई के गीले कचरे से संचालित एक बायोगैस प्लांट हर महीने करीब 130 से 135 किलोग्राम एलपीजी की बचत कर सकता है। प्लांट से निकलने वाला अवशेष उच्च गुणवत्ता की प्राकृतिक खाद के रूप में उपयोगी होता है, जिससे किसानों की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होने के साथ खेती की लागत भी घट सकती है।वेलस्पन बीएपीएल के प्रबंध निदेशक एवं सिंटेक्स के निदेशक यशोवर्धन अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी पशुधन संपदा वाला राज्य है। ऐसे में बायोगैस संयंत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सिंटेक्स सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।कंपनी के फ्लोटिंग टाइप बायोगैस प्लांट कम समय में स्थापित किए जा सकते हैं। इनका रखरखाव कम है और आवश्यकता पड़ने पर इन्हें दूसरी जगह भी आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है। यह तकनीक केवल गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि गौशालाओं, विद्यालयों, अस्पतालों, धार्मिक स्थलों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अन्य बड़े परिसरों में भी उपयोगी हो सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य में बड़े स्तर पर बायोगैस संयंत्र लगाए जाते हैं तो गोबर और गीले कचरे का बेहतर उपयोग होगा, एलपीजी पर निर्भरता घटेगी, जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। ऐसे प्रयास उत्तर प्रदेश सरकार के आत्मनिर्भर गांव और सतत विकास के लक्ष्य को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
