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संग्रामपुर: बीडीओ कार्यालय में पसरा सन्नाटा, साहब नदारद-फरियादी बेहाल


संग्रामपुर/अमेठी। खंड विकास अधिकारी कार्यालय में सोमवार को उस समय सरकारी कामकाज की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए, जब कार्यालय परिसर में अधिकारी और कर्मचारियों की मौजूदगी बेहद कम नजर आई। फरियाद लेकर पहुंचे लोगों को जिम्मेदार अधिकारियों के इंतजार में भटकना पड़ा। बताया जा रहा है कि कार्यालय में खंड विकास अधिकारी समेत कई अधिकारी-कर्मचारी अपने निर्धारित स्थान पर मौजूद नहीं थे। सबसे गंभीर स्थिति यह रही कि जिस कार्यालय पर ग्रामीण विकास योजनाओं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और ग्रामीणों की समस्याओं के निस्तारण की जिम्मेदारी है, वहां ही कामकाज ठप जैसा माहौल दिखाई दिया। कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा और अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे ग्रामीणों को निराश होकर लौटने की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों की मनमानी और समय से कार्यालय में उपस्थित न रहने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली में सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि दूर-दराज से आने वाले लोगों का समय और पैसा दोनों खर्च होता है, लेकिन अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय में ही नहीं मिलते तो उनकी समस्याओं का समाधान कैसे होगा? बीडीओ कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारी प्रवीण कुमार की गैरमौजूदगी ने निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब विकासखंड स्तर के प्रमुख अधिकारी खंड विकास अधिकारी ही कार्यालय में उपलब्ध नहीं होंगे, तो अधीनस्थ कर्मचारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा? ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से कार्यालयों का औचक निरीक्षण कराने, अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच करने और बिना अनुमति गैरहाजिर रहने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की अनुपस्थिति का वास्तविक कारण क्या था और क्या उन्हें किसी सरकारी कार्य या बैठक के लिए बाहर जाना पड़ा था, यह स्पष्ट नहीं हो सका। ऐसे में पूरे मामले पर संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल बीडीओ कार्यालय में पसरा सन्नाटा और अधिकारियों-कर्मचारियों की गैरमौजूदगी सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल छोड़ गई है। जब अधिकारी ही कार्यालय में नहीं होंगे, तो ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर आखिर जाएं कहां?।

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