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आगराः पार्किंग टेंडर पर उठे सवाल! अतुल कॉन्ट्रैक्टर और केला देवी फर्म के दस्तावेजों की जांच की मांग


आगरा। नगर निगम की पार्किंग टेंडर प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। टेंडर प्रक्रिया में शामिल कुछ फर्मों के दस्तावेज, अनुभव प्रमाणपत्र, नो-ड्यूज प्रमाणपत्र, एफडीआर और फीस से जुड़े मामलों को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। शिकायतकर्ताओं ने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार अतुल कॉन्ट्रैक्टर एंड सप्लायर से संबंधित टेंडर प्रक्रिया में नो-ड्यूज लेटर और अनुभव प्रमाणपत्र की जांच को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह भी चर्चा है कि वर्ष 2021 में पार्किंग से जुड़ा विवाद सामने आने के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों द्वारा संबंधित मामले में क्लीन चिट दे दी गई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान प्रक्रिया में फर्म के पुराने रिकॉर्ड और आवश्यक दस्तावेजों का नियमानुसार सत्यापन किया जाना चाहिए।

वहीं केला देवी फर्म को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। जानकारी के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया से करीब एक माह पहले दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण फर्म को प्रक्रिया से बाहर किया गया था। आरोप है कि फर्म द्वारा निर्धारित अनुभव, एफडीआर और फीस से संबंधित शर्तें पूरी नहीं की गई थीं। इसके बावजूद बाद की प्रक्रिया में फर्म के शामिल होने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित फर्म के कार्य और आय से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच आवश्यक है। सूत्रों के अनुसार फर्म द्वारा अब तक करीब 50 लाख रुपये तक का कार्य नहीं किए जाने की बात कही जा रही है, जबकि रिटर्न में दलाली से संबंधित आय दर्शाए जाने की चर्चा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मामले में शिकायत के बाद नगर आयुक्त द्वारा टेंडर निरस्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि दस्तावेज और नियमों की कमियां पहले ही सामने आ गई थीं तो प्रक्रिया में समय और संसाधन खर्च होने के लिए जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए थी।

जानकारी के अनुसार गौरी कृष्णा टोलवेज द्वारा ए और सी पार्किंग तथा बांके बिहारी फर्म द्वारा बी पार्किंग का संचालन किया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि इन फर्मों का पूर्व अनुभव और कार्य प्रदर्शन संतोषजनक रहा है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन फर्मों के पास निर्धारित अनुभव और दस्तावेज उपलब्ध हैं, उन्हें टेंडर प्रक्रिया में समान अवसर क्यों नहीं मिल रहा।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नगर निगम की पार्किंग प्रक्रिया में कई ऐसी फर्में भी शामिल होना चाहती हैं जो शहर में पहले से काम कर रही हैं, लेकिन टेंडर प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न अनिश्चितता के कारण वे आगे आने से हिचक रही हैं।

पूरे मामले में नगर निगम के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि प्रत्येक फर्म के नो-ड्यूज, अनुभव प्रमाणपत्र, एफडीआर, टेंडर फीस, पूर्व कार्यों और पुराने रिकॉर्ड का स्वतंत्र रूप से सत्यापन कराया जाए।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि जिन फर्मों के दस्तावेज पहले अधूरे पाए गए थे, उन्हें बाद में किस आधार पर प्रक्रिया में शामिल किया गया और टेंडर निरस्त होने की स्थिति में प्रक्रिया में लापरवाही के लिए किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई।

अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर निगम इस पूरे मामले में दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करता है या पार्किंग टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल आगे भी बने रहते हैं।

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