हर इंसान का अपना सच जानने का रास्ता होता है- राहुल गांधी
August 20, 2026
छात्रों के प्रदर्शन और मांगों को लेकर चल रहे संघर्ष पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बीजेपी और पीएम मोदी पर निशाना साधा है. साथ ही संघ के विचार को लेकर भी आड़े हाथों लिया. राहुल ने अपने भाषण में शिक्षा सुधार की मूलभूत जरूरतों पर बात की, कि कैसे गांधी जी के विजन को धरातल पर उतारा जा सके.
राहुल गांधी गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 82 वीं जयंती के मौके पर 'हरा भरा स्वराज' थीम से सभा को दिल्ली स्थित जवाहर भवन में संबोधित कर रहे थे. राहुल गांधी ने छात्रों के मुद्दे पर बोलते हुए शिक्षा व्यवस्था को बदलने पर जोर दिया.
राहुल गांधी ने कहा, 'गांधी जी कहा करते थे, हर इंसान खुद में एक यूनीक है. हर इंसान का अपना सच जानने का रास्ता होता है. मैं नहीं कह सकता कि आपका सच क्या है, आरएसएस से यही मेरी समस्या है कि आरएसएस तय करता है, कि वो भारत के 140 करोड़ लोगों की सच्चाई के बारे में जानते हैं. वह यह जानते हैं कि 140 करोड़ लोग अपना सच नहीं जान सकते हैं. लेकिन मेरा विश्वास है कि अगर मैं आपका सच जानता हूं, तो मैं एक पागल इंसान हूं. क्योंकि मैं आप नहीं हूं. मुझे नहीं महसूस हो सकता कि आप किस परिस्थिति से गुजरते हैं. मैं नहीं देख सकता, जो आप देखते हैं. मेरे पास न आप जैसे माता पिता हैं, न दोस्त, न कोई. तो ऐसे में मैं कैसे कह सकता हूं, कि मैं आपका सच जानता हूं. सभी को अपना अपना सच पता है. आज भारत में वैचारिक लड़ाई यही है. गांधी जी ने किताब लिखी, वो उनके सत्य के प्रयोग हैं. लेकिन वो किसी तरह से सत्य का दावा नहीं करते. क्योंकि सभी के सत्य अलग अलग होते हैं.'
इसके आगे राहुल ने कहा, 'आज मुद्दा पर्यावरण या मूलभूत जरूरतों का नहीं है. आज मुद्दा इस वैचारिक लड़ाई का है. असल लड़ाई है कि कुछ ग्रुप के लोग अचानक तय करते हैं, क्योंकि उनका सिस्टम पर कंट्रोल है. वो दावा करते हैं कि वह इस देश के सभी लोगों के सत्य के बारे में जानते हैं.'
गांधी ने कहा, 'नरेंद्र मोदी कहते हैं कि उन्होंने छात्रों को माफ कर दिया. इसका मतलब है कि आप जोकरों के समूह हो, मै बहुत स्मार्ट हूं. मैं सबकुछ जानता हूं. तुम्हें समझ नहीं है, इसलिए मैं आपको माफ करता हूं. और अचानक वो डर गए, और मोहन भागवत जी कहते हैं, कि हमें बच्चों पर हमला नहीं करना चाहिए था. आप हर दिन बच्चों पर हमला कर रहे हैं, कि आपको विश्वास है कि आप बच्चों का सत्य जानते हैं. अगर मेरे पास कोई बच्चा आए, तो मुझे पता है कि वह अपना सच स्वयं जानता है, मुझसे बेहतर जानता है. क्योंकि उन्हें अपना सच बेहतर पता होगा. मेरी ड्यूटी है कि मैं उसे समझ सकूं. उसकी समस्या को समझ सकूं. असल में यही राजनीतिक लड़ाई है.'
उन्होंने कहा, 'आपके माता पिता कहते हैं, आप इंजीनियर बनेंगे. लेकिन मैंने एक लड़की से पूछा कि तुम सच में इंजीनियर बनना चाहती थीं, तो उसने मना कर दिया. समस्या यह है कि हमने आपको चुनने का स्वतंत्रता नहीं दी कि आप क्या चाहते हैं. अगर आप इंजीनियर बनना चाहते हैं, या जो बनना चाहते हैं, आप बन सकें. सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वो आपकी कल्पना के दरवाजे खोले. आपकी अभिव्यक्ति बेहद कीमती है. दलित कहता है कि मेरे साथ प्रातड़ना हुई है, तो यह उसका सत्य है. इसे हम नहीं महसूस कर सकते. हम सिर्फ समझ सकते हैं.'
राहुल ने कहा, 'यही लड़ाई आज छात्रों और सरकार के बीच है. क्योंकि बच्चे जानते हैं कि उनके लिए बेहतर क्या है. लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही. सरकार का दायित्व होना चाहिए कि वो छात्रों को उनके सपने पूरे करने में मदद करे. यही गांधी जी का विजन है भारत के लिए, यही उनका रास्ता है, स्वराज पाने का. हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि कैसे हम इस अभिव्यक्ति को शिक्षा को बदलने में लगाएं. मौलिक सुधार कैसे लाएं, इस पर फोकस करना होगा.
