बीसलपुर। देश सेवा के जज्बे के साथ भारतीय सेना में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले बीसलपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम गोवलपतीपुरा निवासी सूबेदार मेजर महेश गंगवार को सेना के अलंकरण सम्मान से सम्मानित किया गया है। कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने के बाद ऑपरेशन सिंदूर में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले महेश गंगवार को उनके उत्कृष्ट कार्य, समर्पण और अदम्य साहस के लिए सेना प्रमुख की ओर से प्रशस्ति पत्र एवं अलंकरण प्रदान किया गया।दिल्ली स्थित आर्मी हेडक्वार्टर में 15 अगस्त के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में सूबेदार मेजर महेश गंगवार को सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सम्मानित किया। वर्तमान में वह इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोर में सूबेदार मेजर के पद पर तैनात हैं और सेना के लिए इस्तेमाल होने वाले आधुनिक हथियारों तथा हथियारों से लैस वाहनों की तकनीकी देखरेख और मरम्मत से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
महेश गंगवार के पिता दीनानाथ गंगवार खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे को देश सेवा के लिए सेना में भेजने का सपना देखा। महेश ने भी कठिन परिश्रम कर पिता के इस सपने को पूरा किया। 31 अगस्त 1997 को उनका भारतीय सेना में चयन हुआ। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने पूरे साहस और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई। युद्ध में देश की विजय के बाद वह सकुशल घर लौटे। इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में भी सेना मुख्यालय ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना। उम्र के 45वें पड़ाव पर भी उन्होंने पूरे जोश और समर्पण के साथ अभियान में अपनी भूमिका निभाई। मिशन में भारतीय सेना की सफलता के बाद उनकी सेवाओं को विशेष रूप से सराहा गया। महेश गंगवार की उपलब्धि से उनके गांव और परिवार में खुशी का माहौल है। उनके पुत्र प्रिंस गंगवार ने वर्ष 2024 में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्तमान में भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। उनके दूसरे पुत्र बहुराष्ट्रीय कंपनी में इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। परिवार के सदस्यों का कहना है कि महेश गंगवार की उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।
