लखनऊ।राजधानी स्थित देश के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर डठठै इंटर्न डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन और उग्र रूप लेता जा रहा है। मानदेय में बढ़ोतरी की मांग पर अड़े छात्रों की भूख हड़ताल लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। ज्ञळडन् के मुख्य द्वार (गेट नंबर-1) पर डटे आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे अपना कदम पीछे नहीं हटाएंगे।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में महज 12 हजार रुपये प्रतिमाह का स्टाइपेंड दिया जा रहा है। बढ़ती महंगाई के दौर में यह रकम रोजाना 400 रुपये बैठती है, जो किसी सामान्य मजदूर की दिहाड़ी से भी कम है। छात्रों की मांग है कि इस स्टाइपेंड को तत्काल बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए। छात्रों के मुताबिक देश के अन्य राज्यों (जैसे दिल्ली या बिहार) और केंद्रीय संस्थानों में इंटर्न मेडिकोज को 30 से 35 हजार रुपये तक मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश में उनसे रात-दिन काम लेने के बावजूद नाममात्र का मानदेय मिल रहा है।
डठठै और ठक्ै इंटर्न डॉक्टर अस्पतालों में व्च्क्, इमरजेंसी और वार्डों की देखरेख में दिन-रात मुख्य भूमिका निभाते हैं। भूख हड़ताल लंबा खिंचने के कारण ज्ञळडन् की स्वास्थ्य सेवाओं और मरीज देखभाल व्यवस्था पर बुरा असर पड़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है। वहीं, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए ज्ञळडन् के मुख्य गेट पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
मांगों पर प्रशासनिक स्तर से कोई ठोस निर्णय न आने से छात्रों में खासा आक्रोश है। आंदोलनकारी डॉक्टरों का कहना है कि वे केवल अपनी जायज हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। यदि शासन और प्रशासन ने समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो वे इस आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदलकर प्रदेशव्यापी रूप देने को मजबूर होंगे।
