लखनऊ। राजधानी का ऐतिहासिक और अति-व्यस्त अमीनाबाद क्षेत्र, जो सालों-साल से दिन-रात भयंकर ट्रैफिक जाम, सड़कों पर फैले अतिक्रमण और जगह-जगह बने जानलेवा गड्ढों की मार झेल रहा है, वहां अचानक रातों-रात करिश्मा हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के झंडेवाला पार्क आगमन से ठीक पहले, सोता हुआ नगर निगम और पुलिस प्रशासन अचानक गहरी नींद से जाग उठा और श्ऑपरेशन चालाकीश् में जुट गया।
जिस अमीनाबाद में दिन के उजाले में पटरी दुकानदारों का कब्जा रहता है और रात होते ही सब्जी के ठेलों से रास्ते बंद हो जाते हैं, वहां पुलिस-प्रशासन और नगर निगम के आला अफसरों ने खुद सड़कों पर उतरकर रात के अंधेरे में अतिक्रमण हटवाया। जिन जर्जर और बदहाल सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए प्रदेश के मुखिया सालों से निर्देश दे रहे थे, उन पर रातों-रात डामर की परत बिछाकर गड्ढों को ढक दिया गया।
आश्चर्य की बात यह है कि पूरी व्यवस्था केवल इस बात पर केंद्रित है कि मुख्यमंत्री जब सुबह 10रू00 बजे झंडेवाला पार्क पहुंचे, तो उन्हें सब कुछ चकाचक मिले। स्थानीय प्रशासन जिस सफाई और तेजी से मुख्यमंत्री की आंखों में धूल झोंकने की तैयारी कर रहा है, वह अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा तंज कसता है।
सालों से रो रही जनता की फरियाद जो फाइलें दबा न सकीं, वो मुख्यमंत्री के कुछ घंटों के दौरे ने एक रात में सच कर दिखाई। जो पुलिस-प्रशासन दिन के उजाले में अतिक्रमणकारियों के सामने लाचार नजर आता है, वही आधी रात टॉर्च की रोशनी में सड़कों को खाली कराता दिखा।
क्षेत्रीय नागरिकों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह व्यवस्था सिर्फ कुछ घंटों का दिखावा है? जैसे ही मुख्यमंत्री का काफिला अमीनाबाद से बाहर निकलेगा, यह क्षेत्र फिर से अपनी पुरानी बदहाली में लौट आएगा।
वही पटरी दुकानदार फिर कब्जा जमाएंगे, सब्जी के ठेले दोबारा सड़कों पर सजेंगे और आम नागरिक घंटों जाम में पसीना बहाने को मजबूर होगा। रात के अंधेरे में लीपापोती करने वाले अफसरों की यह जादुई सफाई जनता के उस रोजमर्रा के दर्द का मजाक उड़ाती है, जिसे वे 365 दिन झेलते हैं।
