लखनऊ। राजधानी के जलकल विभाग में व्याप्त कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में महाप्रबंधक (जीएम) कुलदीप सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। जीएम पर पद का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये के घोटाले, बेनामी ठेकेदारी और अवैध भर्तियों के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले का संज्ञान लेते हुए मंडलायुक्त ने विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
यह पूरा मामला पूर्व आईएएस अधिकारी राजवीर सिंह द्वारा बीते 30 जुलाई को मुख्यमंत्री से की गई लिखित शिकायत के बाद तूल पकड़ा। शिकायत में जीएम कुलदीप सिंह पर विभाग को निजी लाभ का जरिया बनाने के संगीन आरोप लगाए गए हैं।
आरोप है कि जीएम अपने पुराने ड्राइवर देवी प्रसाद के नाम पर फर्जी फर्में बनाकर खुद करोड़ों रुपये की ठेकेदारी चला रहे हैं। सीएनडीएस विभाग में लगभग 20 प्रतिशत कमीशन लेकर मनपसंद फर्मों को काम बांटने के गंभीर आरोप हैं। शहर में नलकूपों की मरम्मत और रखरखाव के नाम पर करोड़ों रुपये के फर्जी बिल बनाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। जीएम कुलदीप सिंह पर केवल लखनऊ ही नहीं, बल्कि इससे पूर्व झांसी और आगरा में तैनाती के दौरान भी इसी तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं।
शिकायत में यह भी उजागर किया गया है कि लखनऊ में पदभार संभालते ही जीएम ने नियमों को दरकिनार कर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाया। मेयर सुषमा खर्कवाल के पुत्र एवं जलकल के प्रभारी वित्त अधिकारी धर्मेंद्र सिंह की समधिन की फर्म का पंजीकरण स्वयं जीएम कुलदीप सिंह द्वारा नियमों के विरुद्ध जाकर कराया गया। पहले जहां जलकल में लगभग 500 मैंडेज कर्मचारी कार्यरत थे, वहीं जीएम के आते ही इनकी संख्या बढ़ाकर 1200 कर दी गई। आरोप है कि यह बढ़ोतरी बिना किसी आवश्यकता के केवल अवैध वसूली और कमीशनखोरी के लिए की गई है, जिससे जनता के वास्तविक कार्य ठप पड़े हैं।
मंडलायुक्त द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद जलकल विभाग में हड़कंप मच गया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि फर्जी बिलिंग, बेनामी ठेकेदारी और कर्मचारियों की अचानक बढ़ाई गई संख्या से संबंधित फाइलों को खंगाला जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में गाज गिरना तय माना जा रहा है।
