ओपीडी के साथ पुलिस मेडिकल परीक्षण का भी बोझ, स्थानांतरित डॉक्टर ने कार्यभार के बाद नहीं दी आमद महिला चिकित्सक की भी जरूरत
बीसलपुर। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार दियोरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल की जिम्मेदारी फिलहाल एक चिकित्सक तपस त्रिपाठी के कंधों पर है। ऐसे में ओपीडी से लेकर पुलिस द्वारा लाए जाने वाले घायलों और आरोपियों के चिकित्सकीय परीक्षण तक का काम एक ही डॉक्टर को संभालना पड़ रहा है। इसका सीधा असर मरीजों की सुविधा पर पड़ रहा है। सीएचसी में सुबह से ही ओपीडी में मरीजों की कतार लगने लगती है। इसी बीच दियोरिया कोतवाली से घायल या गिरफ्तार आरोपियों को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए अस्पताल लाया जाता है। पुलिस मेडिकल की प्रक्रिया पूरी करने के लिए डॉक्टर को ओपीडी छोड़नी पड़ती है। इसके चलते इलाज के इंतजार में बैठे मरीजों को काफी देर तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। एक ही चिकित्सक पर लगातार बढ़ते काम के दबाव से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने के साथ डॉक्टर पर भी अतिरिक्त कार्यभार बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सकों की तैनाती होने पर ओपीडी और मेडिकल परीक्षण दोनों व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चल सकती हैं। इसी बीच प्रशासन ने बदायूं से डॉक्टर जुबैद का स्थानांतरण दियोरिया सीएचसी के लिए किया था। डॉक्टर ने यहां पहुंचकर कार्यभार ग्रहण कर लिया, लेकिन करीब दो सप्ताह बीतने के बाद भी अस्पताल में उनकी आमद दर्ज नहीं हुई है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी असमंजस है कि वह अवकाश पर हैं या किसी अन्य कारण से अस्पताल में सेवाएं शुरू नहीं कर सके हैं। लैब टेक्नीशियन की कमी का मामला भी पहले चर्चा में रहा है। इस समस्या को संज्ञान में लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बिलसंडा सीएचसी के लैब टेक्नीशियन विजय कुमार को सप्ताह में तीन दिन दियोरिया सीएचसी पर जांच के लिए तैनात किया है। इससे मरीजों को सप्ताह में तीन दिन अस्पताल में जांच की सुविधा मिलने लगी है। ग्रामीणों ने अब सीएचसी में महिला चिकित्सक और चिकित्सा अधीक्षक की स्थायी तैनाती की मांग उठाई है। महिला डॉक्टर नहीं होने के कारण महिलाओं को उपचार के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों की ओर जाना पड़ता है। प्रसव सुविधा में भी परेशानी होने के कारण महिलाओं को बिलसंडा अथवा बीसलपुर भेजा जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि दियोरिया सीएचसी में महिला चिकित्सक की तैनाती हो जाए तो क्षेत्र की महिलाओं को इलाज और प्रसव के लिए बिलसंडा, बीसलपुर और बरखेड़ा की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से चिकित्सकों की कमी दूर कर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की मांग की है।
