लखनऊ। पवित्र श्रावण मास में जहाँ एक ओर पौराणिक बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का सैलाब उमड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर बुद्धेश्वर चैराहा बदहाल यातायात व्यवस्था और कथित अवैध वसूली के अड्डों में तब्दील हो चुका है। स्थानीय व्यापारियों और शिवभक्तों ने पुलिस प्रशासन और नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए बड़े पैमाने पर वसूली के आरोप लगाए हैं।
शिवभक्तों का आरोप है कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट से लेकर बुद्धेश्वर चैराहे तक सड़क किनारे धड़ल्ले से मीट-मांस की दुकानें संचालित हो रही हैं। पवित्र महीने में भी इन दुकानों का चलना श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट पहुंचा रहा है। आरोप है कि कथित अवैध वसूली की आड़ में इन दुकानों को बेखौफ चलाया जा रहा है।
बुद्धेश्वर चैराहे पर दिनभर लगने वाले भीषण जाम ने आम जनता और व्यापारियों का जीना मुहाल कर दिया है। चैराहे के चारों ओर बीच सड़क पर ही ई-रिक्शा और ऑटो खड़े कर सवारियां भरी जा रही हैं। गैर-जनपदों से आने वाली टैक्सी और बसों के बेतरतीब संचालन के एवज में अवैध वसूली का खेल चल रहा है। स्थानीय व्यापारियों का दावा है कि स्थानीय पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की कथित मिलीभगत के कारण इन अव्यवस्थित वाहनों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती।ओवरब्रिज के नीचे और सड़क किनारे लगने वाली अस्थायी दुकानों व ठेलों से निजी लोगों के माध्यम से प्रति ठेला ₹500 से ₹1000 तक की अवैध वसूली का गंभीर आरोप है। दुकानदारों का कहना है कि पैसे न देने पर दुकानें हटाने, तोड़फोड़ करने और पुलिसिया कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें धमकाया जाता है।
भीषण जाम और अव्यवस्था के कारण बुद्धेश्वर बाजार का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्राहक दुकानों तक पहुँचने से कतरा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने तीखा सवाल उठाया है कि आखिर नगर निगम और संबंधित जिम्मेदार विभागों को सड़क किनारे फैला अतिक्रमण और आस्था को ठेस पहुँचाती मीट की दुकानें क्यों नजर नहीं आ रही हैं?
व्यापारियों और शिवभक्तों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे अवैध वसूली खेल की निष्पक्ष जांच कराई जाए, चैराहे की यातायात व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए और दोषी अधिकारियों व वसूलीबाजों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाये।
