लखनऊ। पेड़ों की कटान पर सवाल उठाना एक पत्रकार को भारी पड़ गया। बंथरा थाना क्षेत्र के ग्राम नींवा निवासी पत्रकार कमलेश कुमार चैधरी ने लकड़ी ठेकेदार करीम और उसके साथियों पर फोन पर गाली-गलौज करने, जान से मारने की धमकी देने और घर पहुंचकर दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर पत्रकार ने बंथरा थाने में प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, 3 अगस्त को सरोजनीनगर क्षेत्र में आम के पेड़ों की बड़े पैमाने पर कथित कटान और जेसीबी से पेड़ों की जड़ें निकाले जाने की जानकारी पत्रकार को मिली थी। पत्रकार का कहना है कि उसने संबंधित वन अधिकारियों को सूचना दी और इसके बाद करीम नाम के ठेकेदार से फोन पर पेड़ कटान को लेकर जानकारी ली। आरोप है कि ठेकेदार ने पेड़ काटने की बात कही।
इसके बाद 4 अगस्त को आम के पेड़ों की कटान का वीडियो सामने आया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई और जुर्माने की कार्रवाई की। आरोप है कि इसके बाद रात करीब 8रू30 बजे करीम ने पत्रकार को फोन किया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए जान से मारने की धमकी दी। पत्रकार का दावा है कि फोन कॉल की रिकॉर्डिंग उसके पास मौजूद है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि 6 अगस्त की सुबह करीब सात बजे करीम अपने तीन साथियों के साथ पत्रकार के घर पहुंचा और कथित तौर पर धमकी भरे अंदाज में चेतावनी देकर चला गया।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब पेड़ों की कटान पर सवाल उठाना भी अपराध माना जाएगा? एक तरफ सरकार पर्यावरण बचाने और पेड़ लगाने का संदेश देती है, वहीं दूसरी तरफ यदि शिकायत के अनुसार बागों में जेसीबी चलाकर पेड़ों की जड़ें तक उखाड़ी जा रही हैं तो जिम्मेदार कौन है?
और अगर कार्रवाई के बाद पत्रकार को धमकी दी जाती है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति को धमकी नहीं बल्कि सवाल पूछने वाली पत्रकारिता को डराने की कोशिश भी मानी जा सकती है। हालांकि आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। अब पुलिस की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
