संसद में जारी डेडलॉक पर प्रियंका गांधी का बड़ा बयान! कहा -केंद्रीय गृह मंत्री के सदन में बयान देने तक गतिरोध खत्म होने की संभावना नहीं है
August 10, 2026
संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध के बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को कहा कि सरकार और विपक्ष के बीच बना गतिरोध तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक केंद्रीय गृह मंत्री सदन में बयान नहीं देते. उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए गृह मंत्री का बयान जरूरी है. वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने एफसीआरए संशोधन विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया.
राष्ट्रीय राजधानी में पत्रकारों से बातचीत में प्रियंका गांधी ने कहा, "मुझे लगता है कि गतिरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्रीय गृह मंत्री संसद में बयान नहीं देते."
प्रियंका गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब संसद के दोनों सदनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार हंगामा और कार्यवाही स्थगित होने की स्थिति बनी हुई है. विपक्षी दल सरकार से संबंधित मुद्दों पर सदन के भीतर आधिकारिक जवाब की मांग कर रहे हैं.
इससे पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक और आगामी परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश की संस्थाओं पर पूरा नियंत्रण स्थापित करना चाहती है, ताकि विपक्ष और नागरिक संगठनों की आवाज को दबाया जा सके.
इमरान मसूद ने कहा, "सरकार तानाशाही लागू करना चाहती है. इस देश में तानाशाही नहीं चल सकती. वे हर चीज पर पूरा नियंत्रण चाहते हैं और लोकतंत्र को खत्म करना चाहते हैं." उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी चीजें स्वीकार नहीं की जा सकतीं.
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में दोबारा पेश किया गया है. विधेयक का उद्देश्य विदेशी अंशदान के नियमन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया गया है.
प्रस्तावित कानून में एक नामित प्राधिकरण (Designated Authority) बनाने का प्रावधान है. यह प्राधिकरण उन संस्थाओं की विदेशी अंशदान से खरीदी गई संपत्तियों की निगरानी करेगा, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द, वापस लिया गया या समाप्त हो चुका है.
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि ऐसी संपत्तियों में कोई पूजा स्थल शामिल है, तो नामित प्राधिकरण को उसकी धार्मिक प्रकृति बरकरार रखनी होगी.
इसके अलावा, कानून के उल्लंघन पर अधिकतम सजा को पांच साल की जेल से घटाकर एक साल करने का प्रस्ताव भी है.
FCRA व्यवस्था के तहत गैर-सरकारी संगठनों (NGO), धर्मार्थ संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक ट्रस्टों और उनसे जुड़े संगठनों को मिलने वाले विदेशी धन के उपयोग और प्राप्ति को नियंत्रित किया जाता है.
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच 13,520 संस्थाओं को कुल 55,741 करोड़ रुपये का विदेशी अंशदान मिला. वहीं, 15 जुलाई 2026 तक देश में 14,449 सक्रिय FCRA पंजीकरण थे. इसके अलावा 22,498 पंजीकरण रद्द किए जा चुके थे, जबकि 15,212 पंजीकरण की अवधि समाप्त हो चुकी थी.
