पीताम्बरा धाम मां बगलामुखी मंदिर निर्माण स्थल पर हुआ दिव्य आयोजन, आचार्य यश जी महाराज ने सुनाई शिव महिमा
मुरादाबाद। निकुंज वासिनी सेवा ट्रस्ट की ओर से सावन माह के पावन अवसर पर लक्ष्मीपुर कट्टई, मुंडापांडे, रामपुर रोड, मुरादाबाद स्थित पीताम्बरा धाम मां बगलामुखी मंदिर निर्माण स्थल पर भव्य महारुद्राभिषेक एवं धार्मिक आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और विधि-विधान के साथ भगवान शिव का पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की।
आचार्य यश जी महाराज ने कथा के माध्यम से बताया शिव भक्ति का महत्व
महारुद्राभिषेक के अवसर पर वाराणसी से पधारे आचार्य यश जी महाराज ने भक्तों को धार्मिक कथा का श्रवण कराया। उन्होंने भगवान शिव की महिमा और सावन माह में शिव आराधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कथा के दौरान भक्तगण मंत्रमुग्ध होकर धार्मिक प्रसंगों को सुनते रहे।
ट्रस्ट अध्यक्ष शिप्रा दीक्षित ने किया रुद्राभिषेक, समाजसेवा जारी रखने का संकल्प
आयोजन में निकुंज वासिनी सेवा ट्रस्ट की अध्यक्ष शिप्रा दीक्षित ने विधि-विधान के साथ रुद्राभिषेक किया। उन्होंने कहा कि निकुंज वासिनी सेवा ट्रस्ट द्वारा निरंतर समाजसेवा के कार्य किए जा रहे हैं और भविष्य में भी जरूरतमंदों की सहायता एवं सामाजिक हित के कार्य लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ समाज के प्रति सेवा भाव रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।
सावन में शिव आराधना से मिलता है विशेष लाभ : शांतनु दीक्षित
ट्रस्ट के सचिव शांतनु दीक्षित ने कहा कि सावन माह भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस पवित्र माह में श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव का पूजन करने से मन को शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। उन्होंने निकुंज वासिनी सेवा ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि ट्रस्ट जनसेवा के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
आयोजन में मुख्य यजमान के रूप में दिनेश शर्मा, पूनम शर्मा सहित अन्य श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की। महारुद्राभिषेक एवं कथा के दौरान भक्तों ने पूरी श्रद्धा और ध्यान के साथ कथा का श्रवण किया तथा भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर शिप्रा दीक्षित, स्नेहा दीक्षित, सुनीता भटनागर, रश्मि परिहार, नीतू राज, मीरा सिंह, राम सिंह विमल शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के जयकारों के साथ कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
भगवान शिव की भक्ति से मनुष्य को मिलता है आत्मिक शांति का मार्ग : आचार्य यश जी महाराज
प्रवचन के दौरान वाराणसी से पधारे आचार्य यश जी महाराज ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव केवल देवताओं के देव महादेव ही नहीं, बल्कि करुणा, त्याग, तपस्या और कल्याण के प्रतीक हैं। सावन का पवित्र महीना भगवान शिव को समर्पित है और इस दौरान की गई सच्ची श्रद्धा एवं भक्ति मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव अपने भक्तों की भावना देखते हैं, बाहरी आडंबर नहीं। जो व्यक्ति सच्चे मन से महादेव का स्मरण करता है, उसके जीवन में धैर्य, शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है। शिवलिंग पर जल अर्पित करने का आध्यात्मिक भाव यह है कि मनुष्य अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और नकारात्मक विचारों को त्यागकर सरलता एवं सद्भाव का मार्ग अपनाए।
आचार्य यश जी महाराज ने कहा कि शिव का अर्थ ही कल्याण है। भगवान शिव ने सदैव संसार के कल्याण का संदेश दिया। इसलिए शिव भक्ति का वास्तविक उद्देश्य केवल अपनी मनोकामना पूर्ण करना नहीं, बल्कि परिवार, समाज और समस्त जीवों के कल्याण की भावना रखना भी है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सावन में भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ जरूरतमंदों की सेवा, गौसेवा, गरीबों की सहायता और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। यही सच्ची शिव भक्ति है। उन्होंने कहा कि जिस हृदय में दया, सेवा और परोपकार की भावना होती है, वहीं महादेव का वास्तविक वास होता है।
प्रवचन के अंत में आचार्य यश जी महाराज ने श्रद्धालुओं से भगवान शिव के नाम का स्मरण करते हुए अपने जीवन में सत्य, संयम, प्रेम और सेवा को अपनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। इस दौरान उपस्थित भक्तगण शिव महिमा का श्रवण कर भावविभोर हो गए और पूरे परिसर में ‘हर हर महादेव’ के जयकारे गूंज उठे।
शिव भक्ति के साथ समाजसेवा ही सच्चे धर्म का मार्ग : स्नेहा दीक्षित
निकुंज वासिनी सेवा ट्रस्ट के सचिव शांतनु दीक्षित की धर्मपत्नी स्नेहा दीक्षित ने महारुद्राभिषेक के अवसर पर कहा कि सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना और आत्मिक शांति का संदेश देता है। भगवान शिव करुणा, त्याग, तपस्या और कल्याण के प्रतीक हैं। इस पावन अवसर पर आयोजित महारुद्राभिषेक में शामिल होकर उन्हें अत्यंत आध्यात्मिक एवं आनंद की अनुभूति हुई।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति हमें केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रखती, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता, सेवा, प्रेम और परोपकार की भावना भी सिखाती है। यदि हम महादेव की आराधना के साथ अपने आसपास के लोगों की मदद करें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं, तो यही सच्चे अर्थों में शिव भक्ति होगी।
स्नेहा दीक्षित ने कहा कि निकुंज वासिनी सेवा ट्रस्ट द्वारा धार्मिक आयोजनों के साथ लगातार सामाजिक सेवा के कार्य किए जा रहे हैं। ट्रस्ट का उद्देश्य समाज के जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना और सेवा की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी ट्रस्ट द्वारा सेवा एवं जनकल्याण के कार्यों को और अधिक विस्तार देने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने महारुद्राभिषेक में शामिल सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भक्तों की श्रद्धा और सहयोग से ही ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन सफल होते हैं। उन्होंने सभी से भगवान शिव के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और समाज में प्रेम, भाईचारे एवं सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया।
अंत में उन्होंने सभी श्रद्धालुओं के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए कहा—महादेव सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और प्रत्येक परिवार में सुख-शांति एवं खुशहाली का वास हो।



