पीलीभीत। जनपद में 53 बुलेट मोटरसाइकिलों के मॉडिफाइड साइलेंसरों को सड़क पर रोड रोलर से कुचलने की पुलिस कार्रवाई अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में सुर्खियां बने इस मामले में आरटीआई और कानूनी पैरवी के बाद पुलिस प्रशासन ने भविष्य की कार्रवाई को लेकर लिखित रूप से अपनी सीमा तय कर दी है। विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यातायात पुलिस मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान, जुर्माना और सीज जैसी वैधानिक कार्रवाई करेगी, लेकिन मौके पर वाहन के किसी पार्ट या साइलेंसर को खोलने, उतारने अथवा क्षतिग्रस्त करने की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मामले को लेकर नगर संयोजक हिन्दू जागरण मंच एवं नगर उपाध्यक्ष उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ऋषिकांत कनौजिया ने अपने अधिवक्ता नीलेश चतुर्वेदी के माध्यम से पुलिस की कार्रवाई की वैधानिकता पर सवाल उठाए। आरटीआई के जरिए पुलिस की शक्तियों, वाहन के पार्ट खोलने की प्रक्रिया, जब्ती संबंधी अभिलेख और मालखाना व जीडी में दर्ज प्रक्रिया को लेकर जानकारी मांगी गई। पुलिस की ओर से साइलेंसर वाहन स्वामियों द्वारा स्वेच्छा से दिए जाने की बात सामने आने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल उठाए गए। इसी आधार पर पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रथम अपील दाखिल की गई।
मामले में क्षेत्राधिकारी यातायात आकृति सिंह ने ऋषिकांत कनौजिया और उनके अधिवक्ता को कार्यालय बुलाकर वार्ता की। इसके बाद लिखित सहमति पत्र तैयार किया गया। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से प्रथम अपील का अंतिम आदेश जारी किया गया।
आदेश में अपीलार्थी की ओर से उठाए गए विधिक बिंदुओं का संज्ञान लेते हुए भविष्य की कार्रवाई को अधिक पारदर्शी और वैधानिक तरीके से करने की बात कही गई है।
लिखित आदेश के मुताबिक अब यातायात पुलिस मौके पर वाहन के किसी कलपुर्जे या साइलेंसर को उतारने, खोलने अथवा क्षतिग्रस्त करने की कार्रवाई नहीं करेगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित वाहन के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान, जुर्माना और सीज की कार्रवाई की जाएगी
53 साइलेंसरों को रोड रोलर से नष्ट किए जाने की कार्रवाई ने पुलिस की प्रवर्तन प्रक्रिया और नागरिकों के वाहन संबंधी अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी थी। अब जारी लिखित आदेश को इसी बहस के महत्वपूर्ण परिणाम के रूप में देखा जा रहा है।
ऋषिकांत कनौजिया ने आदेश के बाद संतोष व्यक्त करते हुए प्रथम अपील का निस्तारण कराया। वहीं अधिवक्ता नीलेश चतुर्वेदी की ओर से उठाए गए कानूनी सवालों के बाद पुलिस की भविष्य की कार्रवाई को लिखित रूप में सीमित किए जाने से यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
