प्रतापगढ़।जिले में जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बुधवार को बताया है कि जनपद में डाईमेंफ्लूथ्रिन एवं मेपरफ्लूथ्रिन जैसे गैर-पंजीकृत कीटनाशी तत्वों से निर्मित मच्छर भगाने वाले उत्पादों एवं अगरबत्तियों की अवैध बिक्री के विरुद्ध कृषि विभाग ने सघन अभियान शुरू किया है। विभिन्न ब्रांड नामों से बाजार में बिक रहे अपंजीकृत एवं मानकविहीन उत्पादों को लेकर विभाग ने थोक एवं फुटकर विक्रेताओं को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होने बताया है कि जनपद में कृषि विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा लगातार दुकानों एवं प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जा रहा है। जांच के दौरान अवैध रूप से भंडारित एवं बिक्री के लिए रखे गए संदिग्ध उत्पादों को जब्त किया जा रहा है। साथ ही संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध विधिक कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है। संदिग्ध उत्पादों के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता एवं मानकों की जांच सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने बताया कि डाईमेंफ्लूथ्रिन एवं मेपरफ्लूथ्रिन युक्त ऐसे अपंजीकृत उत्पादों का निर्माण, भंडारण एवं विक्रय कीटनाशी अधिनियम, 1968 एवं नियमावली, 1971 के प्रावधानों का उल्लंघन है। ऐसे उत्पादों से निकलने वाला धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसके संपर्क में आने से श्वसन संबंधी समस्या, एलर्जी, दमा, आंखों में जलन सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उत्पन्न होने की आशंका रहती है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने जनपद के सभी थोक एवं फुटकर विक्रेताओं, विशेष रूप से किराना दुकानों एवं जनरल स्टोर्स को निर्देशित किया है कि वे ऐसे अपंजीकृत एवं मानकविहीन मच्छर भगाने वाले उत्पादों का भंडारण एवं विक्रय तत्काल प्रभाव से बंद कर दें। किसी भी दुकान पर इस प्रकार के उत्पाद पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध कीटनाशी अधिनियम, 1968 की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के तहत उत्पादों की जब्ती, लाइसेंस निरस्तीकरण एवं अभियोजन की कार्रवाई भी की जा सकती है। उन्होने आमजन से अपील की है कि वे बाजार में उपलब्ध अपंजीकृत एवं संदिग्ध मच्छर भगाने वाले उत्पादों की खरीद से बचें तथा केवल प्रमाणित एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित उत्पादों का ही उपयोग करें।
