दिल्ली में छात्र प्रदर्शन मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अदालत ने किया हाई पावर्ड कमेटी बनाने का ऐलान
August 18, 2026
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन मामले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान वकील वृंदा ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह सभी एफआईआर को रद्द करने का आदेश दे। वहीं, सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उपद्रवियों को राहत न मिले। वहीं, वकील सैयद रिजवान ने एफआईआर रद्द करने की मांग का विरोध करते हुए कहा कि इससे गलत उदाहरण बनेगा। रिजवान ने ये भी कहा कि संसद मार्च गैरकानूनी था।
मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार संविधान देता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह हाई पावर्ड कमिटी बनाएगा। सभी पक्ष कमिटी के सामने अपनी बात रख सकेंगे। कोर्ट ने कहा कि सभी पक्ष एफआईआर की लिस्ट सौंपें।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान वकील सैयद रिजवान ने कहा- "एफआईआर रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से विशेष शक्ति के इस्तेमाल की मांग की जा रही है। लेकिन क्या इन लोगों को पछतावा है? कोर्ट उनसे हलफनामा ले कि उन्हें अफसोस है। ऐसा नहीं हुआ तो कल को यही लोग इसे सुप्रीम कोर्ट की कमजोरी की तरह बताएंगे।" इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील ने सवाल कि "इनका क्या लोकस है।" इस पर वकील रिजवान ने कहा- "सबका लोकस है। यह अहम मामला है। आप संसद तक यूं ही नहीं चले जा सकते। यह संदेश जाना चाहिए।" इस पर कोर्ट ने कहा कि हमने आपके सुझाव को नोट किया है।
सुनवाई के दौरान एक वकील ने महिला प्रदर्शनकारियों को मिल रही ऑनलाइन धमकियों का मसला भी रखा। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम ऐसी बातों को गंभीरता से लेते हैं। वकील ने कहा कि उनकी शिकायत ली जानी चाहिए। इस पर CJI ने कहा कि जब हम पूर्व जज की अध्यक्षता में कमिटी बना रहे हैं तो वहां सब जा सकते हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों के आपराधिक रिकॉर्ड में गंभीर अपराध के मुकदमे हों उनको छोड़कर बाकी के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर कोई दण्डात्मक कार्रवाई ना की जाए। सॉलिसिटर जनरल ने भी सहमति जताते हुए कहा कि हत्या, रेप, पॉक्सो जैसे अपराध छोड़ कर। सुनवाई के दौरान कहा गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के खिलाफ नहीं बल्कि आदतन अपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की जांच की जाए। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल और याचिकाकर्ता की वकील वृंदा ग्रोवर दोनों ने अपनी बातें स्पष्टता से कह दी हैं। अब आगे की कार्यवाही तय कर ली जाए।
घायल पुलिस वालों की वकील ने भी अपनी बात कही कि पुलिस पर पथराव किया गया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए पूर्व जजों और डीजीपी स्तर के पूर्व पुलिस अधिकारियों की देखरेख में हाईपावर कमेटी बना रहे हैं। इस पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्णायक जांच करेगी। एक याचिकाकर्ता ने कहा कि पूर्व सैनिक की पत्नी सुदेश को भी प्रताड़ित किया गया।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील शादान फरासत ने कहा- "महिला प्रदर्शनकारियों पर गलत तरीके से बलप्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों पर सरकार कार्रवाई करे।" इस CJI सूर्यकांत ने कहा कि कमिटी हर बात को देखेगी। वकील ने कहा कि दोनों पक्षों की तरफ से नोडल वकील नियुक्त किए जाएं जो कोर्ट की सहायता करें।
CJI ने कहा कि पीड़ित कोई भी हो, हम उनके साथ हैं। हम एक सभ्य समाज में ऐसी चीजें कैसे होने दे सकते हैं? हम इसे बर्दाश्त करने वाले आखिरी लोग होंगे।
एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट से शिकायत की कि विक्टिम के सोशल मीडिया अकाउंट बंद किए जा रहे हैं। उन्हें गाली देने वाले आजाद हैं, जबकि विक्टिम के अकाउंट बंद किए जा रहे हैं। एक वकील ने जंतर-मंतर से प्रोटेस्ट साइट को शिफ्ट करने के सरकार के प्रपोजल की बात रखी। CJI ने कहा कि यह असल में एक एडमिनिस्ट्रेटिव मुद्दा है। एक्सपर्ट्स देख सकते हैं कि यह मुमकिन है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि हमने कमिटी में शामिल होने के लिए एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज और पूर्व डीजीपी से सहमति ली है। इस पर वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि एक पूर्व अटॉर्नी जनरल को भी रखने पर विचार हो। इस पर CJI ने कहा कि अगर आप सब लोग अपने सुझाव आज दे दें तो हम कल आदेश देने का प्रयास करेंगे। कोर्ट ने कहा कि हमने एक पूर्व सीबीआई डायरेक्टर की भी सहमति ली है। बाकी सुझावों पर भी हम विचार करेंगे
