लखनऊ। राजधानी में विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार और लंबित परियोजनाओं को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। बीते दिन नगर आयुक्त गौरव कुमार द्वारा पेच कसे जाने के बाद नगर निगम के अभियंत्रण विभाग में अचानक हलचल तेज हो गई है।
नगर आयुक्त के सख्त तेवरों को देखते हुए चीफ इंजीनियर महेश वर्मा ने आनन-फानन में नगर निगम मुख्यालय में एक बड़ी समीक्षा बैठक बुलाई है। इस बैठक में विभाग के सभी अधिशासी अभियंताओं (म्म्), सहायक अभियंताओं (।म्) और अवरध्जूनियर इंजीनियरों (श्रम्) की मौजूदगी अनिवार्य की गई है।
बैठक के दौरान शहर में चल रही सभी विकास परियोजनाओं, विशेषकर सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े कार्यों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। चीफ इंजीनियर की मेज पर सभी लंबित फाइलों की रिपोर्ट होगी। किस परियोजना का काम कहां रुका हुआ है, अब तक कितनी भौतिक और वित्तीय प्रगति हुई है, और काम में देरी की मुख्य वजह क्या हैकृइन सभी बिंदुओं पर अभियंताओं से सीधे सवाल-जवाब किए जाएंगे।
इस पूरी बैठक का मुख्य केंद्र श्सीएम ग्रिड योजनाश् के तहत चल रहे विकास कार्य रहेंगे। शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए शुरू की गई इस योजना की धीमी रफ्तार पर नगर निगम प्रशासन बेहद गंभीर है। चीफ इंजीनियर इस योजना के तहत अटकी परियोजनाओं की अड़चनों को दूर करने और काम में तेजी लाने के लिए कड़े निर्देश जारी करेंगे।
चीफ इंजीनियर महेश वर्मा ने बैठक की महत्ता को देखते हुए अधिकारियों और अभियंताओं की छुट्टी पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी है। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी संबंधित अधिकारियों का बैठक में उपस्थित होना अनिवार्य है।
नगर आयुक्त गौरव कुमार की कल की सख्ती और उसके बाद आज चीफ इंजीनियर द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम से साफ संकेत मिल रहे हैं कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लखनऊ की जनता को समय पर गुणवत्तापूर्ण विकास कार्य मिल सकें, इसके लिए अब अधिकारियों और अभियंताओं की जवाबदेही तय होना लगभग तय माना जा रहा है।
