Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले फुल एक्शन में मायावती, पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाला


बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले फुल एक्शन में आ गई हैं। उन्होंने पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद और अपने समधी अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाल दिया है। इसके अलावा BSP ने सहारनपुर निवासी और पार्टी कोऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल पर भी कार्रवाई की गई है। इससे पहले मायावती अशोक सिद्धार्थ को 2025 में भी पार्टी से बाहर कर चुकी हैं। अशोक सिद्धार्थ के बाद मायावती ने पिछले साल अपने भतीजे आकाश आनंद को भी पार्टी से निकाल दिया था। माफ़ी मांगने के बाद अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद को पार्टी में वापस लिया था।

मायावती ने अपने इस एक्शन की जानकारी सोशल मीडिया एक्स पर दी है। उन्होंने एक लंबे पोस्ट में अशोक सिद्धार्थ पर पहले भी लिए गए एक्शन का जिक्र किया है। मायावती ने लिखा कि यह बात सभी लोग जानते हैं कि पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ अशोक सिद्धार्थ, पूर्व सांसद को महाराष्ट्र के चुनाव में खा़सकर पार्टी टिकट के बंटवारे को लेकर बी.एस.पी. महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष आदि के साथ सही से तालमेल करके नहीं चलने की वजह से अनुशासनहीनता व दिशा-निर्देश का उल्लंघन करने पर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था तथा उन्हें दोबारा पार्टी में इस शर्त के साथ वापस लिया गया था कि वे दोबारा ऐसी ग़लती नहीं करेंगे और साथ ही उन्हें उत्तर प्रदेश में कहीं पर भी नहीं, बल्कि केवल दूसरे राज्यों में ही पार्टी के जनाधार को बढ़ाने की ज़िम्मेदारी दी जायेगी।

मायावती ने आगे लिखा-पार्टी में दोबारा वापसी के बाद जिन भी राज्यों की ज़िम्मेदारी बीएसपी कोआर्डिनेटर के रूप में अशोक सिद्धार्थ को दी गई वहां इन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी को सही से नहीं निभाया। केवल कर्नाटक ही नहीं बल्कि उड़ीसा व पश्चिम बंगाल इन राज्यों से भी इनकी अनुशासनहीनता अर्थात् पार्टी के दिशा-निर्देश के उल्लंघन की ख़बरें लगातार आते रहने के फलस्वरूप इनको बार-बार चेतावनी देने के बावजूद भी इनमें सुधार नहीं आने की वजह से शनिवार को अशोक सिद्धार्थ को पार्टी की सभी ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था।

मायावती ने लिखा, "लेकिन इसके बाद यूपी में इनके वापस लौटने की ख़बरें जानबूझकर पार्टी में भ्रम की स्थिति फैलाकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव के सघन अभियान को प्रभावित करने का षडयंत्र है। अतः पार्टी व मूवमेन्ट के हित में अशोक सिद्धार्थ को आज तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है और अब इन्हें पार्टी में आगे कतई भी वापस नहीं लिया जायेगा।"

अशोक सिद्धार्थ अभी दक्षिण राज्यों के पार्टी प्रभारी थे। अशोक सिद्धार्थ मायावती के समधी हैं। मायावती के भतीजे आकाश आनंद की शादी अशोक सिद्धार्थ की बेटी डा प्रज्ञा से हुई है। अशोक सिद्धार्थ भी पेशे से डॉक्टर हैं और 2008 में मायावती के कहने पर सरकारी नौकरी छोड़कर बीएसपी में शामिल हुए थे। मायावती ने 2009 में उन्हें एमएलसी और 2016 में राज्यसभा भेजा था।

गौरतलब है कि 31 जुलाई को ही मायावती साफ़ कर चुकी हैं कि यूपी में विधान सभा चुनावों के लिए टिकट फाइनल करने में आकाश आनंद का कोई रोल नहीं है । माना जा रहा है कि यूपी विधान सभा चुनाव के पहले मायावती अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद की बढ़ती ताक़त से काफ़ी खफा हैं।अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर करके ये संदेश देना चाहती है कि बसपा में वही होगा जो मायावती चाहेंगी।

BSP ने सहारनपुर निवासी और पार्टी कोऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उन पर पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारियों के दौरान पार्टी अनुशासन और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। वहीं, पार्टी ने राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को पंजाब का दोबारा प्रभारी नियुक्त किया है। BSP ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश के रहने वाले वरिष्ठ पदाधिकारियों और कोऑर्डिनेटरों को यूपी में पार्टी की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी, यदि वे वर्तमान में दूसरे राज्यों का प्रभार संभाल रहे हैं।

इससे पहले समाजवादी पार्टी के मिशन ब्राह्मण को फेल करने के लिए बसपा ने 20 साल पुराना अपना दांव दोबारा चल चुकी हैं। BSP सुप्रीमो मायावती ने ब्राह्मणों को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स में लिखा कि जिस तरह से साल 2007 में ब्राह्मणों के सहयोग से BSP जीती थी। पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। ठीक वैसा ही 2027 चुनाव में रिपीट होने वाला है।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |