लखनऊ। राजधानी में वकीलों के अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने आखिरकार आर-पार की कार्रवाई शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद रविवार को नगर निगम और जिला प्रशासन की टीम 8 बुलडोजरों और भारी पुलिस बल के साथ रजिस्ट्रार ऑफिस के आसपास बने अवैध चैंबरों को ध्वस्त करने पहुंची।
नगर निगम ने शहर में वकीलों के करीब 200 चैंबरों पर नोटिस जारी कर 29 अगस्त तक खुद से अतिक्रमण हटाने की अंतिम समय सीमा दी थी। इनमें से 58 अवैध चैंबरों को पूरी तरह से चिन्हित किया गया था। तय समय बीतने के बाद भी जब अवैध कब्जे नहीं हटाए गए, तो प्रशासन ने रविवार सुबह ही क्षेत्र की बिजली सप्लाई काट दी और एक-एक करके चैंबरों पर बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया।
गौरतलब है कि इसी साल 17 मई को जब प्रशासन ने अतिक्रमण रोधी अभियान चलाया था, तब वकीलों ने जोरदार हंगामा, हड़ताल और प्रदर्शन किया था, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन शीर्ष अदालत ने सुनवाई से साफ इंकार करते हुए याचिका वापस लेने को कह दिया और अवैध निर्माण हर हाल में गिराने के निर्देश दिए। कोर्ट के इसी कड़े रुख के बाद प्रशासन पूरी तैयारी और विधिक शक्ति के साथ मैदान में उतरा है।
मौके पर नगर निगम और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारी संख्या में पीएसी और पुलिस बल मौजूद है। हालांकि कार्रवाई के दौरान मौके पर वकील भी एकत्रित हैं, लेकिन भारी पुलिस बल की तैनाती और सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के चलते फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और हंगामे की कोई गुंजाइश नहीं बनी। प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि सार्वजनिक भूमि पर एक भी अवैध चैंबर या अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
