लखनऊ। कैसरबाग स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय के आसपास अनधिकृत कब्जों और गंभीर यातायात समस्याओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने नगर निगम प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि क्षेत्र में चिन्हित किए गए 72 अवैध निर्माणों को बिना किसी देरी के तुरंत हटाया जाए।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक या सरकारी जमीन और फुटपाथों पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए किसी पूर्व नोटिस की वैधानिक आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया कि यदि कार्रवाई के दौरान कोई बाधा उत्पन्न होती है, तो आवश्यकतानुसार पुलिस बल की मदद लेकर कार्रवाई को अंजाम दिया जाए।
नगर निगम द्वारा अदालत में सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, चिन्हित किए गए 72 अवैध कब्जों में अधिकांश हिस्से में अधिवक्ताओं द्वारा बनाए गए अस्थाई चैंबर शामिल हैं। शेष स्थानों पर फोटोकॉपी, टाइपिंग, खान-पान के स्टॉल और अन्य दुकानें संचालित की जा रही हैं।
यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया, जिसमें कैसरबाग कोर्ट के आसपास अवैध कब्जों के कारण लगने वाले भीषण जाम का मुद्दा उठाया गया था।
सुनवाई के दौरान पीठ ने एक दुखद घटना का जिक्र करते हुए कहा कि अतिक्रमण की वजह से एम्बुलेंस समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकी और एक मरीज की जान चली गई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि फुटपाथ और सार्वजनिक मार्ग आम नागरिकों की आवाजाही के लिए हैं, न कि निजी या व्यावसायिक कब्जों के लिए।
हाई कोर्ट ने नगर निगम से की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट तलब की है और मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय की है। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के दौरान कोई भी व्यक्ति कानून हाथ में लेने या सरकारी कार्य में बाधा डालने का प्रयास करेगा, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
