नेपाल में बाढ़ का कहर: 626 मौतें, दो हजार से ज्यादा लापता; 2,500 लोगों का रेस्क्यू
August 29, 2026
नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बाद तबाही का मंजर लगातार गंभीर होता जा रहा है. शनिवार को कई और शव बरामद होने के बाद आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 626 हो गई है, जबकि करीब 2500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. वहीं, बचाव दलों ने अभियान के चौथे दिन करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है. इनमें 163 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. नेपाल में खोज, बचाव और राहत अभियान लगातार जारी है.
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, नेपाल के आठ जिलों से अब तक शव बरामद किए गए हैं. इनमें चितवन से 233, नवलपरासी पूर्व से 158, नुवाकोट से 51, गोरखा से 48, नवलपरासी पश्चिम से 47, धादिंग से 45, तनहूं से 31 और रसुवा से 13 शव शामिल हैं.
बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य इलाकों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी. बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई, जबकि बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं के बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है. करीब 2,000 लोगों के अब भी लापता होने की सूचना है.
नेपाल में जारी खोज एवं बचाव अभियान के तहत सुरक्षाबलों ने अब तक 163 विदेशी नागरिकों समेत 2,465 लोगों को सुरक्षित निकाला है. नेपाल सेना के जनसंपर्क निदेशालय के अनुसार, रेस्क्यू किए गए विदेशी नागरिकों में 113 भारतीय, 26 चीनी, 15 दक्षिण कोरियाई, चार जर्मन, इटली और अमेरिका के दो-दो तथा ओमान का एक नागरिक शामिल है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य के लिए नेपाल सेना के 5,000 से अधिक जवानों समेत 11,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.
नेपाल सेना के अनुसार, त्रिशूली और रसुवा क्षेत्र की अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से 191 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. अब तक निकाले गए लोगों में से 2,265 लोगों को हेलीकॉप्टर और 200 लोगों को सड़क मार्ग से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है. बाढ़ प्रभावित इलाकों से लाए गए लोगों को धुंचे और त्रिशूली में बनाए गए आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा सुविधा भी दी जा रही है. अब तक 1,706 लोगों का इलाज किया जा चुका है.
इस बीच नेपाल पुलिस ने बताया कि राजधानी काठमांडू को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाला प्रमुख मुगलिंग-काठमांडू राजमार्ग शनिवार को दोबारा खोल दिया गया. बाढ़ और भूस्खलन के खतरे के कारण यह मार्ग बुधवार से बंद था. स्थिति का आकलन करने के बाद राजमार्ग पर आवागमन फिर शुरू किया गया है. पुलिस के मुताबिक, वाहनों को धीरे-धीरे उनके गंतव्य की ओर जाने की अनुमति दी जा रही है. इससे कई दिनों से सड़क पर फंसे यात्रियों को बड़ी राहत मिली है. बाढ़ और भूस्खलन के खतरे के कारण पिछले चार दिनों से मध्य नेपाल में राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य प्रमुख सड़कों के कई हिस्सों पर यातायात बाधित था.
एनडीआरआरएमए ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने के कारण एक और बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है. ऐसे में राहत एवं बचाव दलों के सामने चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है.
आपदा के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में भी बड़ी मात्रा में सहायता राशि पहुंच रही है. शुक्रवार रात तक कोष में 2.295 अरब नेपाली रुपये से अधिक जमा हो चुके थे. प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, बुधवार दोपहर से गुरुवार आधी रात तक महज 36 घंटे में कोष को 1.91 अरब रुपये प्राप्त हुए. वहीं, शुक्रवार को अकेले 38.55 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि दान की गई. वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यह राशि 10 अलग-अलग वाणिज्यिक बैंकों के खातों में जमा की गई है.
नेपाल-चीन सीमा पर बहने वाली भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद सरकार ने प्रभावित इलाकों को आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया था. इसके बाद विभिन्न संगठनों और लोगों ने प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में सहायता राशि जमा कराई. नए योगदान के बाद राहत कोष में कुल राशि बढ़कर 4.09 अरब रुपये हो गई है, जो इससे पहले 2.17 अरब रुपये थी. सरकार ने वित्त मंत्रालय को राहत कोष में योगदान जुटाने और सहायता के समन्वय के लिए नोडल मंत्रालय बनाया है.
वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले के सचिवालय के अनुसार, संस्थागत दाताओं की ओर से एक करोड़ रुपये या उससे अधिक की सहायता राशि का योगदान व्यक्तिगत रूप से स्वीकार किया जा रहा है. सचिवालय ने बताया कि व्यक्तिगत दानदाता भी मंत्रालय जाकर नकद सहायता राशि जमा कर सकते हैं. नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है. बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने और कई इलाकों में बाढ़ एवं भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षाबल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं.
