कर्ज के बोझ में दबे हिमाचल को अब 'लॉटरी' का सहारा, 27 साल बाद दिवाली से शुरू करने की तैयारी
August 27, 2026
आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में करीब 27 साल बाद सरकारी लॉटरी की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने लॉटरी दोबारा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पेपर और ऑनलाइन लॉटरी की बिक्री के लिए Sole Selling Agent नियुक्त करने को ई-टेंडर जारी कर दिया है। हालांकि, अभी लॉटरी शुरू नहीं हुई है। पहले टेंडर प्रक्रिया पूरी होगी, इसके बाद चयनित एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद लॉटरी शुरू होगी।
सरकार की योजना है कि अगर टेंडर प्रक्रिया तय समय के अनुसार पूरी हुई तो आगामी दिवाली के आसपास लॉटरी का पहला बड़ा ड्रॉ आयोजित किया जा सकता है। लॉटरी की बिक्री ऑफलाइन टिकट के साथ ऑनलाइन माध्यम से भी करने की तैयारी है। यानी लोग अधिकृत बिक्री केंद्र से टिकट खरीदने के अलावा डिजिटल माध्यम से भी टिकट ले सकेंगे।
कोष, लेखा एवं लॉटरी निदेशालय ने 21 अगस्त 2026 को Sole Selling Agent की नियुक्ति के लिए ई-टेंडर जारी किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऑनलाइन बोली जमा करने की प्रक्रिया 3 सितंबर से शुरू होगी और 14 सितंबर तक आवेदन किए जा सकेंगे। तकनीकी बोली 15 सितंबर को खोली जाएगी। वित्तीय बोली खोलने की तारीख बाद में तय होगी। चयनित एजेंसी को वित्तीय बोली खुलने के 30 दिन के भीतर अवार्ड लेटर जारी करने का प्रावधान है। इसके बाद जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने पर लॉटरी संचालन शुरू होगा।
सरकार का मुख्य उद्देश्य लॉटरी के माध्यम से प्रदेश के राजस्व में बढ़ोतरी करना है। सरकार को इससे करीब 50 करोड़ रुपये सालाना राजस्व मिलने की उम्मीद है। आर्थिक संकट और एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के बीच सरकार नए राजस्व स्रोत तलाश रही है। सरकार ने पंजाब और केरल जैसे राज्यों में लॉटरी से होने वाली आय का उदाहरण भी दिया है।
लॉटरी संचालन के लिए चयनित Sole Selling Agent को सरकार को 10 करोड़ रुपये सालाना लाइसेंस फीस देनी होगी। इस फीस में हर साल 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान है। इसके अलावा एजेंसी को कम से कम 6 करोड़ रुपये सालाना Minimum Guaranteed Amount देना होगा और लॉटरी के कुल कारोबार पर कम से कम 2 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी की बोली देनी होगी।
एजेंसी को 30 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी भी जमा करनी होगी। इसके लिए अपरिवर्तनीय बैंक गारंटी या निर्धारित बैंक की एफडीआर का प्रावधान है। टेंडर में भाग लेने वाली कंपनी को 2 करोड़ रुपये की EMD और 5 लाख रुपये की टेंडर फीस भी देनी होगी।
नई व्यवस्था के तहत एक दिन में अधिकतम 12 लॉटरी ड्रॉ आयोजित किए जा सकेंगे। इसके अलावा साल में तीन बड़े बंपर ड्रॉ आयोजित करने की योजना है। दिवाली, नए साल और अन्य प्रमुख त्योहारों या विशेष अवसरों पर बंपर ड्रॉ रखे जा सकते हैं। राष्ट्रीय महत्व के दिनों जैसे 26 जनवरी, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर को लॉटरी ड्रॉ नहीं होगा।
सरकार ने नई व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। लॉटरी की बिक्री, वितरण, डिजिटल भुगतान, रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था होगी। इसके लिए चयनित एजेंसी को Special Purpose Vehicle यानी SPV बनाना होगा, जिससे प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड और ऑडिट ट्रेल उपलब्ध रहे।
लॉटरी दोबारा शुरू करने से पहले हिमाचल सरकार ने हिमाचल प्रदेश राज्य लॉटरी विनियमन नियम-2026 तैयार कर नोटिफाई किए हैं। इन नियमों में सरकारी निगरानी, पेपर और ऑनलाइन लॉटरी, ड्रॉ की प्रक्रिया और पारदर्शिता से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। नियमों के अनुसार टिकट की न्यूनतम बिक्री कीमत 2 रुपये रखी जा सकती है।
हिमाचल प्रदेश में सरकारी लॉटरी पहले भी चलती थी, लेकिन वर्ष 1999 में तत्कालीन प्रेम कुमार धूमल सरकार के कार्यकाल में इसे बंद कर दिया गया था। उस समय लॉटरी से जुड़े सामाजिक नुकसान, आर्थिक शोषण और धोखाधड़ी की शिकायतों को देखते हुए इसे बंद करने का फैसला लिया गया था। अब करीब 27 साल बाद सुक्खू सरकार ने आर्थिक संसाधन बढ़ाने के उद्देश्य से इसे दोबारा शुरू करने का फैसला लिया है।
लॉटरी शुरू करने के फैसले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर सांसद अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर लॉटरी टेंडर तत्काल वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि लॉटरी से मिलने वाली संभावित आय प्रदेश के वित्तीय संकट का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने जीएसटी अनुपालन और डिजिटल एकीकरण के जरिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने की बात कही है।
कांग्रेस सरकार के इस फैसले की बीजेपी ने कड़ी निंदा की है। हमीरपुर से पांच बार के मौजूदा लोकसभा सांसद और बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वे हिमाचल प्रदेश के लोगों के हित में इस प्रस्ताव को पूरी तरह से छोड़ दें।
बता दें कि हिमाचल सरकार कर्ज के बोझ में दबी है। अभी हाल में ही खबर आयी थी कि सरकार नौकरशाही संबंधी खर्च कम करने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की संख्या कम करने की योजना बना रही है।
