पीलीभीत। जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन संचालित 203 विद्यालय जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। इन विद्यालयों की स्थिति ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लंबे समय से भवनों की बदहाल स्थिति के बीच अब प्रशासन ने जर्जर विद्यालयों के ध्वस्तीकरण की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।विकास क्षेत्रों से प्राप्त विवरण के अनुसार सबसे अधिक 74 जर्जर विद्यालय अमरिया क्षेत्र में हैं। इसके बाद पूरनपुर में 41, मरौरी में 32, बरखेड़ा में 19, बिलसंडा में 17, बीसलपुर में 12, ललौरीखेड़ा में 7 तथा पीलीभीत नगर क्षेत्र में 1 विद्यालय जर्जर स्थिति में चिन्हित किया गया है।
जर्जर विद्यालयों की संख्या पर नजर डालें तो अमरिया क्षेत्र की स्थिति सबसे चिंताजनक है। यहां 74 विद्यालयों के भवन जर्जर पाए गए हैं। पूरनपुर में 41 और मरौरी में 32 विद्यालयों की हालत भी गंभीर बताई गई है। यानी इन तीन क्षेत्रों में ही जर्जर विद्यालयों की संख्या 147 पहुंच रही है।इसके अलावा बरखेड़ा में 19, बिलसंडा में 17, बीसलपुर में 12, ललौरीखेड़ा में 7 और पीलीभीत नगर क्षेत्र में एक विद्यालय जर्जर घोषित किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में विद्यालयों का जर्जर होना शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे की स्थिति पर सवाल खड़े करता है।
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि चिन्हित सभी जर्जर विद्यालयों के ध्वस्तीकरण की तकनीकी स्वीकृति जिलाधिकारी से प्राप्त हो चुकी है। इसके बाद अब संबंधित विद्यालयों के जर्जर भवनों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि ध्वस्तीकरण के बाद निकलने वाली सामग्री को यूं ही नहीं छोड़ा जाएगा। प्राप्त सामग्री का विवरण स्टॉक रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा और नियमानुसार उसका उपयोग विद्यालय की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा।
जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के बाद प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल विद्यालयों में प्रथम आवश्यकता के कार्यों के लिए किए जाने की योजना है। इसमें मध्यान्ह भोजन कक्ष, विद्यालय तक संपर्क मार्ग से खड़ंजा तथा बाउंड्रीवाल निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं।इन कार्यों को ग्राम निधि से कन्वर्जेन्स के माध्यम से कराया जाएगा। इससे एक ओर जर्जर भवनों से पैदा होने वाला खतरा कम होगा, वहीं दूसरी ओर ध्वस्तीकरण से प्राप्त उपयोगी सामग्री को विद्यालयों के विकास में लगाया जा सकेगा।मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ध्वस्तीकरण के बाद विद्यालयों में कराए जाने वाले आवश्यक विकास कार्यों का प्राक्कलन तैयार कराया जाए और उसे मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध कराया जाए। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।अब बड़ा सवाल यह है कि 203 जर्जर विद्यालयों के ध्वस्तीकरण और उनके स्थान पर सुरक्षित एवं आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था का काम कितनी तेजी से पूरा होता है। क्योंकि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित भवन केवल सुविधा नहीं, बल्कि बुनियादी आवश्यकता है। प्रशासन की इस कवायद से उम्मीद जगी है कि जर्जर भवनों के खतरे से निजात मिलने के साथ सरकारी स्कूलों की तस्वीर भी बदलेगी।
