बीसलपुर। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पीलीभीत की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा और वरिष्ठ नेता डॉ. रत्नेश गंगवार की समाजवादी पार्टी में वापसी के बाद जिले के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। दोनों नेताओं की वापसी को समाजवादी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। वहीं, उनके सपा में लौटने के बाद स्थानीय स्तर पर भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक मुकाबले को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं।
रविवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में हेमराज वर्मा समेत कई नेताओं की पार्टी में वापसी हुई। इस दौरान डॉ. रत्नेश गंगवार, उनकी पत्नी प्रियंका गंगवार और उनके साथ आए समर्थकों के सपा में शामिल होने की घोषणा की गई। पार्टी नेतृत्व की ओर से सभी का स्वागत किया गया।हेमराज वर्मा की वापसी का असर पीलीभीत की राजनीति में देखने को मिल रहा है। वहीं डॉ. रत्नेश गंगवार की वापसी से बीसलपुर क्षेत्र में भी सियासी चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। दोनों नेताओं की अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रियता और समर्थकों के बीच पकड़ को देखते हुए सपा इसे संगठन के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम मान रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं की वापसी का असर केवल संगठन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों की सक्रियता भी बढ़ती है। ऐसे में हेमराज वर्मा और डॉ. रत्नेश गंगवार की वापसी आने वाले समय में जिले के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
सपा की राजनीति में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण को अहम माना जाता रहा है। हेमराज वर्मा की वापसी को इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं डॉ. रत्नेश गंगवार के सपा में लौटने से बीसलपुर क्षेत्र में पार्टी के पुराने संपर्कों और समर्थक वर्ग को फिर से सक्रिय करने की कोशिश के तौर पर भी इसे देखा जा रहा है। दोनों नेताओं के सपा में लौटने के बाद अब जिले में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। खासकर 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में सपा में हुई इन वापसी को लेकर भाजपा समेत अन्य दलों में भी मंथन शुरू होने की चर्चा है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि हेमराज वर्मा और डॉ. रत्नेश गंगवार की सपा में वापसी का 2027 के विधानसभा चुनाव में कितना असर पड़ेगा। इसका जवाब आने वाले दिनों में दोनों नेताओं की राजनीतिक सक्रियता और उनके समर्थकों की भूमिका से सामने आएगा।
