लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी में स्वास्थ्य विभाग और शासन ने मरीजों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। निर्धारित मानकों और सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन न करने वाले 184 निजी अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना के पैनल से बाहर (डि-इम्पैनल) कर दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन अस्पतालों को अचानक नहीं हटाया गया है। अस्पतालों को मार्च माह से ही अपनी कमियां दूर करने और निर्धारित मानक पूरे करने के लगातार अवसर दिए जा रहे थे। कई बार नोटिस और पर्याप्त समय मिलने के बावजूद इन अस्पतालों ने अनिवार्य व्यवस्थाएं पूरी नहीं कीं, जिसके बाद प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।
कार्रवाई की मुख्य वजह अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी अनिवार्य शर्तों का अधूरा होना है। जांच के दौरान पाया गया कि कई अस्पतालों के पासवैध फायर एनओसी नहीं थी। बायो-मेडिकल वेस्ट निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं थी।आयुष्मान योजना के तहत निर्धारित न्यूनतम ढांचागत और नैदानिक मानक पूरे नहीं थे।
मामले पर राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि मरीजों की जान और सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश बृजेश पाठक ने कहा कि ष्अस्पतालों में आने वाले मरीजों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि यह निलंबन स्थायी नहीं है। यदि बाहर किए गए अस्पताल भविष्य में फायर छव्ब् समेत सभी आवश्यक मानक और शर्तें पूरी कर लेते हैं, तो नियमानुसार जांच के बाद उन्हें पुनः आयुष्मान योजना में इम्पैनल किया जा सकता है।
