लखनऊ। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश में अपनी कला के माध्यम से प्रतिष्ठित करने वाली लखनऊ घराने की प्रख्यात कथक साधिका श्रीमती संध्या मित्रा (पाचोनिया) को भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के 16वें दीक्षांत समारोह में संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्हें यह उपाधि उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री जयवीर सिंह के करकमलों द्वारा प्रदान की गई।
श्रीमती संध्या मित्रा ने मात्र तीन वर्ष की आयु से ही नृत्य एवं संगीत की विधिवत शिक्षा ग्रहण करना प्रारम्भ किया। उन्होंने राष्ट्रीय कथक केंद्र दिल्ली सहित विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा अपनी कला के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक धरोहर का देश-विदेश में प्रभावी प्रचार-प्रसार किया। वर्षों की कठिन साधना, समर्पण एवं उत्कृष्ट शोध के फलस्वरूप उन्हें यह प्रतिष्ठित उपाधि प्राप्त हुई।
उनके शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहायह उपलब्धि न केवल श्रीमती संध्या मित्रा के लिए व्यक्तिगत गौरव का विषय है, बल्कि उनके परिवार, समाज तथा कला एवं संगीत जगत के लिए भी अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है।
श्रीमती संध्या मित्रा सामाजिक सेवा में सक्रिय एवं भारतीय रेल के वरिष्ठ अभियंता श्री अनिल मित्रा की धर्मपत्नी हैं। उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर परिवारजनों, गुरुजनों, शुभचिंतकों एवं कला प्रेमियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। इस अवसर पर कुछ मित्रों द्वारा एक पार्टी का आयोजन किया गया जिसमें देर रात तक बधाई देने वालों की भीड़ बनी रही।
