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बीसलपुरः विद्यालय में बच्चों पर मौत बनकर गिरा टीनशेड, 13 बच्चे और दो शिक्षिकाएं घायल! छह बच्चों की हालत गंभीर, लकड़ी की बल्लियों और जर्जर दीवार के सहारे खड़ा था ढांचा


बीसलपुर। तहसील क्षेत्र के गांव अमृता खास स्थित बालक राम सरस्वती शिशु विद्या मंदिर स्कूल में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब बच्चों की पढ़ाई के दौरान स्कूल परिसर में लगा टीनशेड अचानक भरभराकर गिर गया। टीनशेड के नीचे बैठे बच्चे और दो शिक्षिकाएं उसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद स्कूल परिसर में चीख-पुकार मच गई। आनन-फानन में स्थानीय लोगों और स्कूल में मौजूद लोगों ने मलबा हटाकर बच्चों और शिक्षिकाओं को बाहर निकाला। हादसे में 13 बच्चों और दो शिक्षिकाओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें छह बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिनका उपचार सीएचसी बीसलपुर में चल रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के समय बच्चे कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे थे। कुछ बच्चे स्कूल परिसर में बने टीनशेड के नीचे बैठे थे। बताया जा रहा है कि टीनशेड किसी मजबूत लोहे के ढांचे के बजाय लकड़ी की बल्लियों के सहारे खड़ा था। इसी दौरान टीनशेड को सहारा दे रही जर्जर दीवार अचानक ढह गई और उसके साथ पूरा टीनशेड नीचे आ गिरा।

अचानक हुए हादसे से बच्चों में भगदड़ और चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह मलबा हटाकर बच्चों को बाहर निकाला। सूचना मिलते ही प्रशासन भी सक्रिय हुआ और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। मौके पर पहुंचे एसडीएम नागेंद्र पांडे ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जानकारी ली और जांच के निर्देश दिए।

टीनशेड गिरने के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। परिजन और आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। मलबे में फंसे बच्चों और शिक्षिकाओं को निकालने के लिए राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को एंबुलेंस की मदद से उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।

हादसे की सूचना मिलने के बाद घायल बच्चों के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। बच्चों की हालत देखकर परिवारों में चिंता और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

हादसे के बाद स्कूल की भवन व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि जिस टीनशेड के नीचे बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा था, वह लकड़ी की बल्लियों के सहारे खड़ा था। जिस दीवार पर ढांचे का भार था, वह भी कथित तौर पर जर्जर हालत में थी।

सवाल यह है कि जब स्कूल में छोटे-छोटे बच्चे पढ़ रहे थे तो उनकी सुरक्षा के लिए इस तरह के असुरक्षित ढांचे को क्यों बनाए रखा गया। यदि समय रहते जर्जर दीवार और टीनशेड की मरम्मत करा दी जाती तो शायद हादसे को टाला जा सकता था।

हादसे के बाद विद्यालय की मान्यता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार विद्यालय को कक्षा पांच तक की मान्यता प्राप्त है, जबकि आरोप है कि यहां कक्षा आठ तक की कक्षाएं संचालित की जा रही थीं।

यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो यह गंभीर मामला होगा। सवाल यह भी है कि विद्यालय में मान्यता से अधिक कक्षाएं संचालित होने की जानकारी संबंधित विभाग को थी या नहीं। यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि जानकारी नहीं थी तो विभागीय निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हादसे के बाद शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, भवन की स्थिति और शैक्षिक व्यवस्थाओं की समय-समय पर जांच होनी चाहिए। ऐसे में यदि विद्यालय में जर्जर दीवार और असुरक्षित टीनशेड मौजूद था तो निरीक्षण के दौरान यह स्थिति अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आई?

वहीं, यदि विद्यालय में कथित तौर पर पांचवीं से आगे की कक्षाएं संचालित की जा रही थीं तो इसकी भी जांच आवश्यक है।

हादसे के बाद विद्यालय प्रबंधन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि घटना के बाद प्रबंधन से जुड़े कुछ लोग मौके से चले गए। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में विद्यालय प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता घायल बच्चों और शिक्षिकाओं का बेहतर उपचार है। इसके साथ ही विद्यालय भवन, टीनशेड की स्थिति, मान्यता और कक्षाओं के संचालन की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।

अमृता खास के इस हादसे ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल सिर्फ टीनशेड गिरने का नहीं, बल्कि यह है कि बच्चों को ऐसे ढांचे के नीचे बैठाकर पढ़ाने की नौबत क्यों आई।

विद्यालय की मान्यता क्या है? वहां कितनी कक्षाएं संचालित हो रही थीं? भवन और टीनशेड की सुरक्षा की जांच कब हुई थी? यदि निरीक्षण हुआ था तो जर्जर ढांचा अधिकारियों की नजर से कैसे बच गया? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे।

अभिभावकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, विद्यालय की मान्यता और कक्षाओं के संचालन की पड़ताल तथा भवन की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। साथ ही लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है।

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