बीसलपुर। कांवड़ यात्रा की आस्था और उत्साह के बीच एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। बरेली-बीसलपुर रोड पर कामुआ मोड़ के पास कांवड़ियों को लेकर लौट रही ट्रॉली से गिरकर 12 वर्षीय बालक की पहिए के नीचे आने से मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान ग्राम बसारा निवासी ललित पुत्र वीरपाल मिश्रा के रूप में हुई है। मासूम की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे गांव में मातम पसर गया। जिस घर में कांवड़ यात्रा से लौटने की खुशी होनी थी, वहां अचानक चीख-पुकार मच गई। बताया गया कि ग्राम बसारा निवासी ललित गांव के अन्य श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के साथ कछला घाट गया था। श्रद्धालुओं ने वहां से कांवड़ में पवित्र जल भरा और इसके बाद सभी लोग ट्रॉली के माध्यम से अपने गांव बसारा लौट रहे थे। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में यह यात्रा एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन जाएगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यात्रा के दौरान ललित चलती ट्रॉली पर बार-बार चढ़ने और उतरने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान बरेली-बीसलपुर रोड पर कामुआ मोड़ के पास अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया। पैर फिसलने से वह ट्रॉली से नीचे जा गिरा। इससे पहले कि आसपास मौजूद लोग उसे संभाल पाते, वह ट्रॉली के दाहिने पहिए की चपेट में आ गया। हादसा इतना अचानक हुआ कि ट्रॉली के साथ चल रहे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। भारी पहिया बालक के ऊपर से गुजर गया और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद ट्रॉली में सवार श्रद्धालुओं और आसपास मौजूद ग्रामीणों में चीख-पुकार मच गई।
कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालु जल लेकर अपने गांव लौट रहे थे। सभी के मन में धार्मिक उत्साह और जलाभिषेक को लेकर उमंग थी। लेकिन कामुआ मोड़ पर हुए हादसे ने पूरा माहौल बदल दिया। मासूम ललित की मौत की खबर मिलते ही साथ चल रहे ग्रामीण स्तब्ध रह गए। किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि कुछ देर पहले उनके साथ चल रहा 12 वर्षीय बालक अब इस दुनिया में नहीं रहा। हादसे की सूचना तत्काल पुलिस आपात सेवा 112 को दी गई। सूचना मिलते ही बिथरी चैनपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद शव को कब्जे में लिया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।
पुलिस ने पंचनामा भरने के बाद शव को ग्राम बसारा पहुंचाया। जैसे ही ललित का शव गांव पहुंचा, परिजनों में कोहराम मच गया। मां और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मासूम बेटे को इस हालत में देखकर परिजन बदहवास हो उठे। परिजनों और ग्रामीणों के लिए यह हादसा किसी सदमे से कम नहीं है। जिस मासूम के सुरक्षित घर लौटने का इंतजार किया जा रहा था, उसके शव के पहुंचते ही घर की खुशियां मातम में बदल गईं। गमगीन माहौल में परिजनों ने बालक का अंतिम संस्कार कर दिया। हादसे ने कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धार्मिक यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों से आवागमन करते हैं। ऐसे में चलती ट्रॉली पर बच्चों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बेहद जरूरी है। एक छोटी सी लापरवाही ने परिवार का चिराग बुझा दिया। मासूम ललित की मौत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कांवड़ यात्रा के दौरान वाहनों में सवार श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर कितनी निगरानी की जा रही है। हादसे के बाद क्षेत्र के लोगों में भी घटना को लेकर आक्रोश और चिंता का माहौल है। फिलहाल पुलिस ने मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे के वास्तविक कारणों और परिस्थितियों की जांच की जा रही है। मासूम की मौत से बसारा गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर है।
