आपका मुंह नहीं खुलता, कोई सील दिया क्या?-खरगे
July 30, 2026
राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला. गुरुवार को उच्च सदन में बोलते हुए खरगे ने कहा, "पेपर चुराने वाले बचते रहे और मेहनत करने वाले पिटते रहे. यह कैसा न्याय है?" उन्होंने सवाल उठाया कि पेपर लीक से कितने मासूम छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ, कितने लोग घायल हुए और कितने माता-पिता परेशान हुए. उन्होंने अमित शाह से कहा कि वे बोल नहीं रहे हैं तो क्या किसी ने उनके मुंह को सील दिया क्या?
खरगे ने कहा कि नए विधेयक में केवल आंकड़े बदले गए हैं, लेकिन इससे समस्या का समाधान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि असली जरूरत परीक्षा प्रणाली को इस तरह मजबूत बनाने की है कि पेपर लीक ही न हो. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि यही कदम उठाने थे तो 2024 में क्यों नहीं उठाए गए. उनके मुताबिक, उस समय लोकसभा चुनाव सामने थे और सरकार राजनीतिक कारणों से ऐसा नहीं करना चाहती थी.
राहुल गांधी का भी किया जिक्र कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान लगातार पेपर लीक और युवाओं के मुद्दे को उठाते रहे. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उस समय कार्रवाई इसलिए नहीं की क्योंकि इसका श्रेय विपक्ष को मिल सकता था. खरगे ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार करने के बजाय सरकार ऐसा कानून लेकर आई, जिसे दो साल के भीतर ही संशोधित करना पड़ रहा है. उनके अनुसार, यह विधेयक समस्या का समाधान नहीं, बल्कि मौजूदा माहौल को शांत करने का प्रयास है. उन्होंने कहा कि युवाओं के व्यापक विरोध को देखने के बाद सरकार को एहसास हुआ कि यदि आंदोलन और बढ़ा तो उसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है. इसी वजह से सरकार ने छात्रों की कुछ मांगें मानने का फैसला किया.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर टिप्पणी खरगे ने सीजेपी के आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने दबाव और डर की वजह से धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से हटाया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार और कुर्सी बचाने के लिए यह कदम उठाया. उन्होंने कहा कि जब छात्र लगातार अपनी समस्याएं उठा रहे थे, तब सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें अराजक बताया. उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का नाम लेते हुए कहा कि यदि सरकार पहले संवाद करती तो इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को लाठीचार्ज का सामना नहीं करना पड़ता.
उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी भाजपा सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की है. अमित शाह पर साधा निशाना खरगे ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह छोटे-छोटे मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं, लेकिन इस मामले में चुप हैं. उन्होंने सवाल किया कि जब दिल्ली में इतना बड़ा घटनाक्रम हुआ तो गृह मंत्री ने इस पर बयान क्यों नहीं दिया. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, "क्या किसी ने उनका मुंह सिल दिया है?" उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र संवाद चाहते थे, लेकिन उन्हें पैलेट गन, करंट वाली लाठियां और बंद मेट्रो स्टेशन मिले.
उन्होंने दावा किया कि 100 से अधिक छात्र घायल हुए, कई छात्र आईसीयू और वेंटिलेटर तक पहुंच गए तथा कई छात्रों को पैलेट के छर्रे लगे. उन्होंने कहा कि यह स्थिति शर्मनाक है. खरगे ने अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, "बंद कमरे में रहकर आप हमेशा नहीं रह सकते. एक दिन जनशक्ति आपको बाहर लेकर आएगी." बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई असंसदीय शब्द का प्रयोग नहीं किया है और उनका आशय था कि जनता जवाब मांगेगी. कार्रवाई के आदेश पर उठाए सवाल अपने भाषण के अंत में खरगे ने पूछा कि लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया.
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सादे कपड़ों में छात्रों की पिटाई करने वाले लोग कौन थे और सीआरपीएफ किसके निर्देश पर कार्रवाई कर रही थी. उन्होंने कहा कि यदि केंद्रीय गृह मंत्री इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
