- ई-टेंडर, आवंटन प्रक्रिया और बैंक खातों तक की जानकारी, डीएम को भी भेजी शिकायत की प्रति
पीलीभीत। शहर के व्यस्त गांधी स्टेडियम रोड स्थित अशोक कॉलोनी में (ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज के सामने) गन्ना विभाग की भूमि पर बन रही व्यावसायिक दुकानों को लेकर अब सवाल तेज हो गए हैं। सरकारी एवं सहकारी निकाय की इस भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य की वैधानिकता, स्वीकृतियों और आवंटन प्रक्रिया को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। इसी बीच अधिवक्ता नीलेश चतुर्वेदी ने पूरे मामले को सार्वजनिक हित से जुड़ा बताते हुए सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत जिला गन्ना अधिकारी से विस्तृत जानकारी मांगी है। उन्होंने अपने आवेदन की एक प्रति जिलाधिकारी को भी भेजकर मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।आरटीआई आवेदन में अधिवक्ता ने निर्माण कार्य से संबंधित सभी प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृतियों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी पूछा है कि जिस भूमि पर दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है, उसका वर्तमान भू-उपयोग (लैंड यूज) क्या है और क्या वह नियमानुसार व्यावसायिक श्रेणी में दर्ज है। यदि पूर्व में भूमि का उपयोग किसी अन्य श्रेणी में था तो उसके व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तन संबंधी आदेश एवं अभिलेखों की प्रतियां भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
इसके अतिरिक्त आवेदन में यह जानकारी भी मांगी गई है कि निर्माण कार्य के लिए संबंधित विकास प्राधिकरण अथवा नगर पालिका परिषद से भवन मानचित्र की स्वीकृति प्राप्त की गई है या नहीं। यदि स्वीकृति ली गई है तो उसके दस्तावेज, अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तथा अन्य आवश्यक अनुमतियों की प्रमाणित प्रतियां भी उपलब्ध कराई जाएं।
आरटीआई में दुकानों के आवंटन की पूरी प्रक्रिया को भी सवालों के घेरे में रखा गया है। अधिवक्ता ने पूछा है कि दुकानों के आवंटन के लिए कौन-सी नीति अपनाई जा रही है, क्या इसके लिए सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया गया, क्या ई-निविदा या खुली बोली की प्रक्रिया अपनाई गई तथा उससे संबंधित समस्त अभिलेख उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही अब तक प्राप्त आवेदनों, चयनित आवंटियों की सूची और आवंटन से संबंधित आदेशों की प्रतियां भी मांगी गई हैं।निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी जानकारी मांगी गई है। आवेदन में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट, कार्यदायी संस्था का विवरण, निर्माण लागत तथा कार्य की निगरानी से जुड़े अभिलेखों की मांग की गई है। इसके अलावा दुकानों के आवंटन से प्राप्त होने वाली धनराशि किस सरकारी राजकोष अथवा समिति के किस बैंक खाते में जमा की जा रही है, इसका पूरा वित्तीय विवरण और संबंधित अभिलेख भी मांगे गए हैं।अधिवक्ता नीलेश चतुर्वेदी का कहना है कि मामला सरकारी संपत्ति और सार्वजनिक धन से जुड़ा है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोपरि होना चाहिए। उनका कहना है कि विभाग से मांगी गई प्रमाणित सूचनाएं प्राप्त होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण और आवंटन की पूरी प्रक्रिया शासन के निर्धारित नियमों एवं प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जा रही है या नहीं। फिलहाल आरटीआई आवेदन के बाद इस पूरे मामले पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं और अब विभाग के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।
