- एडीएम ने सर्पदंश से बचाव के लिए जारी की एडवाइजरी, बरसात में सतर्क रहने की अपील
प्रतापगढ़। बरसात के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिलाधिकारीध्अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (वि0ध्रा0) आदित्य कुमार प्रजापति ने गुरुवार को जनपदवासियों के लिए सर्पदंश से बचाव, पहचान, प्राथमिक उपचार एवं उपचार संबंधी विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। उन्होने लोगों से अपील की है कि सावधानी और समय पर उपचार ही सर्पदंश से होने वाली जनहानि को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है। एडवाइजरी में बताया गया है कि भारत में लगभग 270 से अधिक प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ ही अत्यधिक विषैले होते हैं। इनमें प्रमुख रूप से करैत, कोबरा, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर को सबसे खतरनाक माना जाता है।
करैत सांप का रंग चमकदार काला या नीला, सफेद पतली धारियाँ होती है। काटने पर बहुत हल्का दर्द या बिल्कुल दर्द नहीं होता, लेकिन जहर बहुत तेजी से असर करता है। मांसपेशियों में लकवा, सांस लेने में दिक्कत होती है। रात समय में ज्यादा सक्रिय होता है। कोबरा सांप का रंग काला, भूरा या पीला, फन फैलाने पर पीछे ‘‘ओम’’ या ‘‘चश्मा’’ जैसा निशान होता है, इसके काटने से तेज दर्द, सूजन, उल्टी, सांस रुकना, मांसपेशियों में कमजोरी होती है, यह दिन और रात दोनों में सक्रिय रहता है। रसेल वाइपर सांप का रंग पीले-भूरे रंग पर गहरे गोल निशान होता है, इसके काटने से तेज दर्द, सूजन, रक्तस्राव, उल्टी, गुर्दे फेल हो सकते हैं। यह दिन में सक्रिय रहता है, खासकर खेतों में। सॉ-स्केल्ड वाइपर का रंग भूरा या ग्रे, जिगजैग पैटर्न का होता है, इसके काटने से बहुत दर्द, सूजन, खून जमने की समस्या, आंतरिक रक्तस्राव होता है। यह रात में सक्रिय होता है।
उन्होने बताया कि सर्पदंश होने पर घबराने के बजाय पीड़ित को शांत रखें, काटे गए अंग को अधिक हिलने-डुलने न दें तथा घाव को साफ पानी और साबुन से धोकर बिना देर किए निकटतम सरकारी अस्पताल पहुंचाएं। यदि संभव हो तो सांप के रंग या आकार को याद रखें, लेकिन उसे पकड़ने या मारने का प्रयास बिल्कुल न करें। एडवाइजरी में सांप के काटने के लक्षण के बारे में बताया गया कि दो छेद जैसे निशान, सूजन व दर्द, उल्टी, चक्कर, बेहोशी, सांस लेने में कठिनाई, खून जमने में दिक्कत (ब्लीडिंग), लकवा या शरीर का सुन्न होता है। सर्पदंश से बचाव के उपाय के सम्बन्ध में बताया गया है कि फर्सध्जमीन पर न सोएं, चारपाई का प्रयोग करें। झाड़ियों और घास की सफाई रखें, घर के आसपास। खेत या जंगल में जूते और फुल पैंट पहनें। टॉर्चध्लालटेन लेकर चलें रात में, दरवाजे और खिडकियाँ बंद रखें, विशेषकर बारिश में, चूहों की सफाई करें, क्योंकि सांप चूहों को खाने आते हैं।
सांप के काटने पर प्राथमिक उपचार के सम्बन्ध में बताया गया है कि व्यक्ति को शांत रखे, ताकि जहर तेजी से न फैले, काटे गए अंग को हिलने न दें, स्थिर रखें, काटा स्थान धोएं (साफ पानी और साबुन से), व्यक्ति को सीधा अस्पताल ले जाएं, समय ही जीवन है। अगर हो सके तो सांप का रंगध्आकार याद रखें, पर पकड़ने की कोशिश न करे। एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि झाड़-फूंक, तांत्रिक उपचार या घरेलू नुस्खों पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है। इसी प्रकार काटे गए स्थान को ब्लेड से काटना, चूसना, कसकर बांधना या पीड़ित को दौड़ाना भी नुकसानदायक है। ऐसे किसी भी उपाय से बचने की सलाह दी गई है। एडवाइजरी में यह भी बताया गया है कि भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पतालों में पॉलीवेलेंट एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) उपलब्ध है, जो विषैले सांपों के जहर के उपचार में प्रभावी है। पीड़ित को जितनी जल्दी एंटीवेनम उपचार मिल जाएगा, उसके स्वस्थ होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। जिला प्रशासन ने जनसामान्य से अपील की है कि सर्पदंश की किसी भी घटना में तत्काल 108 अथवा 102 एम्बुलेंस, 112 आपातकालीन सेवा या 1077 जिला आपदा नियंत्रण कक्ष पर संपर्क करें तथा निकटतम पीएचसीध्सीएचसी या सरकारी अस्पताल में पहुंचकर चिकित्सकीय उपचार अवश्य प्राप्त करें।
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