अमेठी। गायत्री शक्तिपीठ अमेठी में चतुर्मास के अवसर पर गुरुवार से चालीस दिवसीय सामूहिक चैबीस लाख गायत्री महामंत्र जप अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। अनुष्ठान के पहले दिन श्रद्धालुओं ने सामूहिक जप कर राष्ट्र, समाज एवं विश्व कल्याण की कामना की।विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी गायत्री शक्तिपीठ अमेठी में चालीस दिवसीय सामूहिक जप अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। परिव्राजक इन्द्र देव शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार पदार्थ कच्चा और पक्का होता है, उसी प्रकार मनुष्य का व्यक्तित्व भी कच्चा और परिष्कृत होता है। कच्चा व्यक्तित्व संवेदनशील, अव्यवस्थित और दिशाहीन होता है, जबकि परिष्कृत व्यक्तित्व सजग, अनुशासित और प्रभावशाली बन जाता है। उन्होंने कहा कि साधना ही वह प्रक्रिया है, जो साधारण व्यक्ति को असाधारण बनाती है। साधना से ही व्यक्ति को सिद्धि प्राप्त होती है और व्यक्तित्व का वास्तविक परिष्कार संभव होता है।कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में नियमित साधना को स्थान देना चाहिए। चतुर्मास का समय आत्मचिंतन, आत्मसंयम और आध्यात्मिक उन्नयन का श्रेष्ठ अवसर है। इस दौरान की गई साधना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।अनुष्ठान में अशोक शर्मा, राम बहादुर पाण्डेय, सुयोधन सिंह, कविता शर्मा, सुनीता सिंह, शकुंतला पाण्डेय, कुसुम शर्मा, दिनेश सिंह, संगीता शर्मा, सुधा गुप्ता, शीला जायसवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। आयोजकों ने बताया कि चालीस दिनों तक प्रतिदिन सामूहिक जप एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अमेठीः चालीस दिवसीय चैबीस लाख गायत्री महामंत्र जप अनुष्ठान शुरू
July 30, 2026
अमेठी। गायत्री शक्तिपीठ अमेठी में चतुर्मास के अवसर पर गुरुवार से चालीस दिवसीय सामूहिक चैबीस लाख गायत्री महामंत्र जप अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। अनुष्ठान के पहले दिन श्रद्धालुओं ने सामूहिक जप कर राष्ट्र, समाज एवं विश्व कल्याण की कामना की।विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी गायत्री शक्तिपीठ अमेठी में चालीस दिवसीय सामूहिक जप अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। परिव्राजक इन्द्र देव शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार पदार्थ कच्चा और पक्का होता है, उसी प्रकार मनुष्य का व्यक्तित्व भी कच्चा और परिष्कृत होता है। कच्चा व्यक्तित्व संवेदनशील, अव्यवस्थित और दिशाहीन होता है, जबकि परिष्कृत व्यक्तित्व सजग, अनुशासित और प्रभावशाली बन जाता है। उन्होंने कहा कि साधना ही वह प्रक्रिया है, जो साधारण व्यक्ति को असाधारण बनाती है। साधना से ही व्यक्ति को सिद्धि प्राप्त होती है और व्यक्तित्व का वास्तविक परिष्कार संभव होता है।कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में नियमित साधना को स्थान देना चाहिए। चतुर्मास का समय आत्मचिंतन, आत्मसंयम और आध्यात्मिक उन्नयन का श्रेष्ठ अवसर है। इस दौरान की गई साधना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।अनुष्ठान में अशोक शर्मा, राम बहादुर पाण्डेय, सुयोधन सिंह, कविता शर्मा, सुनीता सिंह, शकुंतला पाण्डेय, कुसुम शर्मा, दिनेश सिंह, संगीता शर्मा, सुधा गुप्ता, शीला जायसवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। आयोजकों ने बताया कि चालीस दिनों तक प्रतिदिन सामूहिक जप एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

