भांवरकोल/गाजीपुर। भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और समर्पण की एक प्रेरणादायक मिसाल क्षेत्र के कनुवान गांव से सामने आई है। गांव निवासी एवं बिहार के सिवान में कार्यरत जिला जज शशिकांत राय ने अपनी इकलौती बहन पूनम राय को दूसरी बार नया जीवन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर रक्षाबंधन के पवित्र बंधन को सार्थक कर दिया है।
जानकारी के अनुसार पूनम राय, जिनका एक पुत्र है जो वर्तमान में इंटरमीडिएट का छात्र है, वर्ष 2017 में गंभीर किडनी रोग से पीड़ित हो गई थीं। उस समय उनके पिता रामआशीष राय ने 69 वर्ष की आयु में गुरुग्राम स्थित मेदांता मेडिसिटी अस्पताल में अपनी किडनी दान कर पुत्री को जीवनदान दिया था। इस कठिन उपचार और प्रत्यारोपण की व्यवस्था में भी शशिकांत राय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
लगभग नौ वर्ष बाद पुनः किडनी में समस्या उत्पन्न होने पर 27 मई 2026 को कोलकाता के विवासिटी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मध्यमग्राम में सफल किडनी प्रत्यारोपण कराया गया। इस प्रकार पूनम राय को दूसरी बार नया जीवन मिला।
ऑपरेशन से पूर्व जब परिवार में स्वाभाविक चिंता का माहौल था, तब पूनम राय ने अपने भाई का हौसला बढ़ाते हुए विश्वास के साथ कहा, भइया, मैं स्वस्थ होकर लौटूंगी और अगले रक्षाबंधन पर आपकी कलाई पर राखी अवश्य बांधूंगी। बहन के इस अटूट विश्वास और साहस ने सभी को भावुक कर दिया।
सनातन परंपरा में भाई-बहन का रिश्ता त्याग, सुरक्षा और समर्पण का प्रतीक माना गया है। जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने संकट की घड़ी में द्रौपदी की लाज बचाकर रक्षा का धर्म निभाया था, उसी प्रकार शशिकांत राय ने अपनी बहन के जीवन की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास कर भाई के कर्तव्य और पारिवारिक समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
यह प्रेरक घटना समाज को प्रेम, त्याग, पारिवारिक मूल्यों और रक्षाबंधन के वास्तविक महत्व का सशक्त संदेश दे रही है।
