पीलीभीत। समाजवादी पार्टी के जिला महासचिव नफीस अहमद अंसारी के विरुद्ध दर्ज किए गए मुकदमे को लेकर जिले की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। बुधवार को समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और पूरे मामले को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि सत्ता के दबाव में पार्टी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है तथा विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।सपा नेताओं ने पुलिस अधीक्षक को बताया कि पार्टी का जिला कार्यालय पहले से न्यायालय में विचाराधीन मामला है। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन द्वारा कथित रूप से मनमाने ढंग से कार्यालय को खाली कराया गया। नेताओं का कहना है कि कार्यालय में रखा पार्टी का सामान प्रशासन द्वारा जब्त कर लिया गया और बाद में बुलडोजर चलाकर भवन को ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई को उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताते हुए इसकी भी जांच की मांग उठाई।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार जिला महासचिव नफीस अहमद अंसारी ने संगठनात्मक गतिविधियों और पार्टी बैठकों के संचालन के लिए अपनी निजी संपत्ति स्थित गैरेज को अस्थायी रूप से उपलब्ध कराया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संपत्ति पूरी तरह उनकी निजी संपत्ति है और इसके लिए किसी प्रकार का किरायानामा अथवा लिखित अनुबंध नहीं किया गया था। सपा नेताओं का कहना है कि इसी मामले को आधार बनाकर उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया, जो पूरी तरह निराधार और राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है।
सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में पार्टी द्वारा जनसमस्याओं को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन किए गए हैं। साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं का समाजवादी पार्टी में शामिल होने का सिलसिला भी तेज हुआ है। इससे सत्तारूढ़ दल घबराया हुआ है और विपक्ष की बढ़ती लोकप्रियता को रोकने के लिए प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि समाजवादी पार्टी लगातार किसानों, युवाओं, व्यापारियों और आम जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठा रही है। जनता के बीच पार्टी की बढ़ती स्वीकार्यता से राजनीतिक विरोधी परेशान हैं। यही कारण है कि पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कर उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।
सपा नेताओं ने पुलिस अधीक्षक से मांग की कि मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए। साथ ही राजनीतिक दबाव में दर्ज मुकदमे की वास्तविकता को सामने लाकर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास कायम रह सके।
पुलिस अधीक्षक ने प्रतिनिधिमंडल की बात सुनते हुए मामले की जांच नियमानुसार कराए जाने का आश्वासन दिया। हालांकि इस संबंध में प्रशासनिक पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधानसभा प्रत्याशी दिव्या गंगवार, जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र मिश्रा कट्टर, युवजन सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजकुमार राजू, जिला उपाध्यक्ष अकबर अंसारी, मखदूम खान, जिला कोषाध्यक्ष गयासुद्दीन मंसूरी, विधानसभा अध्यक्ष इम्तियाज अल्वी, प्रदेश सचिव सत्येंद्र मौर्य, जिला अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग निरंजन गंगवार, गुरजोवन सिंह, दिनेश वर्मा, देव कुमार मौर्य, अभि गंगवार, मोहम्मद सलीम सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सपा नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई और विपक्षी नेताओं का उत्पीड़न जारी रहा तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज को दबाने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा और जनता के अधिकारों की लड़ाई लगातार जारी रहेगी।
