पीलीभीत। जनपद में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर मंगलवार को कचहरी परिसर में विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान एक ढाबे पर कार्यरत बाल श्रमिक को चिन्हित कर बाल श्रम से मुक्त कराया गया। इसके बाद बालक को आवश्यक कार्रवाई हेतु बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
संयुक्त अभियान के तहत होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों एवं अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान एक बालक श्रम करते हुए पाया गया, जिसे तत्काल बाल श्रम से मुक्त कराकर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति ने बालक के परिजनों को भविष्य में उसे किसी भी प्रकार के श्रम कार्य में न लगाने की सख्त हिदायत देते हुए बालक को उनके सुपुर्द कर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम-2016 के तहत खतरनाक प्रक्रियाओं में बाल श्रमिकों को नियोजित करने वाले सेवायोजकों के विरुद्ध एक वर्ष तक की सजा, 50 हजार रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों प्रकार के दंड का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त प्रति बाल श्रमिक 20 हजार रुपये की राशि चाइल्ड लेबर वेलफेयर फंड में जमा कराई जाती है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यदि किसी बालक के माता-पिता को पहली बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद दोबारा बाल श्रम में संलिप्त पाया जाता है, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
संयुक्त अभियान में श्रम प्रवर्तन अधिकारी शशिकला, संरक्षण अधिकारी मीनाक्षी पाठक, संरक्षण अधिकारी रमनदीप कौर, चाइल्ड हेल्पलाइन परियोजना समन्वयक निर्वान सिंह, थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग प्रभारी निरीक्षक गोविंद सिंह, एसजेपीयू प्रभारी अर्जुन सिंह, कांस्टेबल अमित, महिला कांस्टेबल संध्या गहलौत एवं सीमा प्रतुल सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने कहा कि जनपद में बाल श्रम के उन्मूलन के लिए नियमित रूप से निरीक्षण और रेस्क्यू अभियान चलाए जाएंगे। आमजन से भी अपील की गई है कि कहीं भी बाल श्रम होता दिखाई दे तो इसकी सूचना संबंधित विभागों को दें, ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
