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लखनऊः पदोन्नति के लिए लड़नी पड़ी लंबी कानूनी लड़ाई, हाईकोर्ट के आदेश के बाद बने संयुक्त निदेशक! मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर मंत्रियों के पत्रों के बावजूद महीनों लटका रहा मामला, प्रशासनिक कार्यशैली पर उठे सवाल


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विद्युत सुरक्षा निदेशालय में पदोन्नति से जुड़ा एक मामला प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। विभाग के उपनिदेशक मिथिलेश कुमार को संयुक्त निदेशक पद पर पदोन्नति पाने के लिए न केवल शासन और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटाने पड़े, बल्कि अंततः उच्च न्यायालय की शरण भी लेनी पड़ी।

प्रकरण के अनुसार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 13 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश के अनुपालन में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक 27 फरवरी 2026 को आयोजित हुई। आरोप है कि बैठक में पदोन्नति संबंधी संस्तुति तैयार होने के बावजूद लंबे समय तक आदेश जारी नहीं किया गया, जिससे न्यायालय के आदेश का समयबद्ध अनुपालन भी नहीं हो सका।

मामले को लेकर मिथिलेश कुमार की पत्नी एवं भाजपा की पूर्व जिला महामंत्री आशा सिंह सविता ने मुख्यमंत्री, ऊर्जा विभाग तथा जनप्रतिनिधियों को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों द्वारा जानबूझकर पदोन्नति आदेश रोका गया। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि पदोन्नति के पात्र अधिकारी को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ा तथा उसकी वरिष्ठता और गरिमा भी प्रभावित हुई।

प्रकरण में फतेहपुर के जहानाबाद विधायक राजेंद्र सिंह पटेल ने मार्च 2026 में शासन को पत्र लिखकर न्यायालय के आदेश के अनुपालन में शीघ्र पदोन्नति आदेश जारी करने की मांग की। इसके बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 19 मई 2026 को अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा विभाग को पत्र भेजकर उच्च न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन कराने तथा मिथिलेश कुमार को संयुक्त निदेशक पद पर पदोन्नत करने का अनुरोध किया। वहीं ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ए.के. शर्मा के कार्यालय से भी 15 मई 2026 को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई के लिए अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा विभाग को निर्देशित किया गया।

इन सभी पत्राचार और न्यायालय के आदेश के बाद आखिरकार मिथिलेश कुमार को उपनिदेशक से संयुक्त निदेशक, विद्युत सुरक्षा निदेशालय के पद पर पदोन्नति प्रदान कर दी गई।

हालांकि यह पूरा प्रकरण कई गंभीर प्रश्न छोड़ गया है। जब उच्च न्यायालय का आदेश, जनप्रतिनिधियों की संस्तुतियां और मंत्रियों के पत्र होने के बावजूद पदोन्नति आदेश महीनों तक लंबित रहा, तो विभागीय जवाबदेही, प्रशासनिक पारदर्शिता और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि पत्रों में लगाए गए आरोप सही हैं, तो यह मामला शासन स्तर पर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय किए जाने की मांग करता है।

इस पद पर नियुक्ति के साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया  वर्ष 2027 में वर्तमान निदेशक गिरीश सिंह के सेवानिवृत्ति के उपरांत मिथिलेश कुमार को निदेशक विद्युत सुरक्षा निदेशालय के पद पर पदोन्नत किया जा सकेगा

मिथिलेश कुमार के संयुक्त निदेशक पद पर प्रोन्नत होने पर तमाम सामाजिक संगठनों एवं सहकर्मियों द्वारा शुभकामना एवं बधाई दिए जाने का क्रम  जारी है।

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