पीलीभीत। रविवार को धौलपुर जिले में धार्मिक आस्था और सनातन संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिला। 128 बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी प्रवक्तानंद महाराज के प्रथम धौलपुर आगमन पर श्रद्धालुओं ने अभूतपूर्व उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। महामंडलेश्वर की उपाधि प्राप्त करने के बाद पहली बार धौलपुर पहुंचे स्वामी जी के दर्शन के लिए विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक स्वागत का विशेष उत्साह दिखाई दिया। जगह-जगह पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और जयघोषों के बीच श्रद्धालुओं ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरे मार्ग पर ष्जय श्रीरामष्, ष्सनातन धर्म अमर रहेष् और ष्महामंडलेश्वर स्वामी प्रवक्तानंद महाराज की जयष् के उद्घोष वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरते रहे। स्वागत कार्यक्रम धौलपुर नगर, जाटोली, बरेह मोरी सिंघावली तथा मलिकपुर स्थित श्री वनखण्डी बालाजी धाम में आयोजित किए गए। विशेष रूप से वनखण्डी बालाजी धाम में आयोजित स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में संत, महंत, सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इसके उपरांत वनखण्डी बालाजी धाम परिसर में विशाल धार्मिक सत्संग का आयोजन हुआ। अपने प्रेरणादायी प्रवचन में स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल परंपराओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ पद्धति है, जो मानवता, सेवा, करुणा और सदाचार का संदेश देती है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिकता के साथ-साथ अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी आत्मसात करें। स्वामी जी ने कहा कि यदि युवा पीढ़ी अपने संस्कारों और संस्कृति से जुड़ी रहेगी तो राष्ट्र का भविष्य और अधिक सुदृढ़ एवं उज्ज्वल होगा।
धार्मिक आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन, संत वाणी एवं आध्यात्मिक प्रवचनों का क्रम देर तक चलता रहा। श्रद्धालुओं ने इसे आत्मिक शांति और धार्मिक जागरण का अद्भुत अवसर बताया। कार्यक्रम में प्रेम सिंह लोधा, डॉ. शिव चरण कुशवाहा, गिरीश लोधा, आशा देवी, शशि देवी लोधा, राम चरण दास महंत, महंत बालक दास, हेम सिंह लोधा, केशव सिंह लोधा, महावीर अग्रवाल, भारत सिंह सिसोदिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता की। समापन अवसर पर स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने आयोजन से जुड़े सभी श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए समाज में प्रेम, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना के विस्तार की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को एक सूत्र में बांधने और सकारात्मक संस्कारों को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम हैं।
