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उत्तराखड: जिलाधिकारी ने सीमांत क्षेत्रों में सेना को वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया की समीक्षा की, अधिकारियों को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश


उत्त्राखड । जिले के दुर्गम और भारत-चीन सीमा से सटे सीमांत क्षेत्रों में देश की सुरक्षा को मजबूत करने और बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में सेना को विभिन्न रक्षा परियोजनाओं के लिए हस्तांतरित की जाने वाली वन भूमि के मामलों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने राजस्व विभाग, वन विभाग और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से प्रत्येक लंबित प्रस्तावों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमांत क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इन मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और वन भूमि (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) से जुड़ी सभी तकनीकी व कागजी बाधाओं को जल्द दूर करने के निर्देश दिए ।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में सेना की चैकियों और संपर्क मार्गों के लिए प्रस्तावित भूमि का स्थलीय निरीक्षण जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे वन संरक्षण अधिनियम के तहत आने वाले मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएं और जहां भी प्रतिपूरक वनीकरण के लिए भूमि की आवश्यकता है, उसे राजस्व विभाग के सहयोग से तत्काल चिन्हित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों तक सुविधाएं पहुंचाना शासन की प्राथमिकता है।

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