आगरा । जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान आगरा द्वारा आयोजित आर्ट इंटीग्रेशन इन टीचिंग एंड लर्निंग कार्यशाला के द्वितीय दिवस में शिक्षण में नाटक के प्रस्तुतीकरण के सत्रों का संचालन किया गया । डायट प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने कहा कि इन सभी कलाओं और विधाओं को शिक्षण में प्रयोग किया जाए जिससे कि बच्चों की कक्षाओं को रुचिकर बनाया जा सके स द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में रंगमंच कलाकार चंद्रशेखर बहावर ने नाटक, नाटक कला और अभिनय के आंगिक और वाचिक अभिनय की चर्चा की । शिक्षण में कहानी कहने के लिए नाटक और डायलॉग के प्रयोग के महत्व को बताया गया । फिल्म और रंगमंच की बारीकी को बताते हुए प्रशिक्षुओं को सिखाया गया कि शिक्षक की शिक्षण में इन विधाओं को सीखने के उद्देश्य को सार्थक बनाने के लिए शिक्षक को ऑब्जरवेशन गुण की आवश्यकता होती है । जिससे वह इन विधाओं को बारीकी के साथ आत्मसात कर पाए और कक्षा रूपी रंग मंच पर अभिनय द्वारा कक्षा शिक्षण को रुचिकर बना सके । पंच परमेश्वर कहानी का पूरा अभिनय कराकर कार्यशाला को रोमांचित बनाया गया । द्वितीय सत्र में कार्यक्रम संयोजिका डॉ. प्रज्ञा शर्मा द्वारा प्रशिक्षुओं को 9 समूह में विभाजित किया गया स आर्ट सर्कल, क्रिएटिव सोल, धमाका, वसुंधरा, कल के दीवानी, क्रिएटिव फ्रेंड्स , न्यू टैलेंट आदि के द्वारा अपनी अपनी कहानी और नाटक का चयन कर प्रत्येक समूह ने अपने-अपने अभिनय को प्रस्तुत किया स अभिनय में डायलॉग के उतार-चढ़ाव को बेहतर बनाने की सभी सुझावों को रिहर्सल किया स समूह वसुंधरा के द्वारा श्रवण कुमार की कहानी और समूह क्रिएटिव सोल के द्वारा नमक का दरोगा जैसी कहानियों का बेहतरीन अभिनय प्रशिक्षुओं के द्वारा प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मी शर्मा द्वारा किया गया स कार्यक्रम में डॉ प्रज्ञा शर्मा, डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय,दिलीप कुमार गुप्ता, पुष्पेंद्र सिंह, संजीव सत्यार्थी, यशवीर सिंह ,अनिल कुमार हिमांशु सिंह, अबू मोहम्मद आसिफ, धर्मेंद्र गौतम, रंजना पांडे आदि उपस्थित रहे ।
