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भारत की ब्रह्मोस पर यूएई, वियतनाम, रूस और इजरायल की नजर


ईरान जंग अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई कि यूएई और पश्चिम एशिया के दूसरे देशों ने भारत की ब्रह्मोस मिसाइल को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई. दुनिया की चुनिंदा सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल में शुमार ब्रह्मोस ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के एक-दो नहीं बल्कि पूरे 11 मिलिट्री बेस तबाह कर दिए थे. ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है. यूएई समेत पश्चिम एशिया के कई देश भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं.

मिडिल ईस्ट में हालिया संघर्ष के दौरान ईरान की बैलिस्टिक, हाइपरसोनिक और क्लस्टर मिसाइलों ने इजरायल के साथ-साथ खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. यूएई, कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन, ओमान, कतर और इराक तक ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों का असर देखा गया. अमेरिका की पैट्रियाट और THAAD जैसी रक्षा प्रणालियां भी कई मौकों पर इन हमलों को रोकने में संघर्ष करती नजर आईं.

ईरान से बढ़ते खतरे के बीच यूएई अपनी सैन्य क्षमता मजबूत करने में जुट गया है. इसी क्रम में उसने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने में रुचि दिखाई है. भारत और यूएई के बीच हाल के वर्षों में रक्षा सहयोग भी तेजी से बढ़ा है.

ब्रह्मोस की बढ़ती मांग की एक बड़ी वजह उसका युद्ध में साबित प्रदर्शन है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने पाकिस्तान के 11 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था. दावा किया गया कि चीन निर्मित HQ-9 और HQ-16 जैसी एयर डिफेंस प्रणालियां ब्रह्मोस को न तो रोक सकीं और न ही समय रहते उसका पता लगा सकीं.

फिलीपींस के बाद अब वियतनाम भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल के तटीय संस्करण की खरीद को लेकर आगे बढ़ रहा है. यह संस्करण समुद्र तट से दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाने में सक्षम है. यूएई की लंबी समुद्री सीमा और तटीय तेल प्रतिष्ठानों को देखते हुए माना जा रहा है कि उसकी दिलचस्पी भी इसी संस्करण में हो सकती है. वर्ष 2022 में फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस की पांच बैटरियां खरीदी थीं और उनकी आपूर्ति भी हो चुकी है.

रिपोर्टों के अनुसार, रूस भी ब्रह्मोस मिसाइल में रुचि दिखा रहा है. ब्रह्मोस का विकास भारत और रूस ने मिलकर किया है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के कारण रूस के मिसाइल भंडार पर दबाव बढ़ा है, जिसके चलते वह भारत से ब्रह्मोस लेने पर विचार कर सकता है.

इजरायल के रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल आमिर बरम (सेवानिवृत्त) ने नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की. बैठक में भारत-इजरायल रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई. इस दौरान राजनाथ सिंह के कार्यालय में रखे ब्रह्मोस और पिनाका के मॉडल ने भी ध्यान आकर्षित किया. इसके अगले दिन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हथियारों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की बात कही. ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि भविष्य में इजरायल भी भारत की ब्रह्मोस मिसाइल में रुचि दिखा सकता है.

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