रिलायंस अनिल अंबानी समूह के दो वरिष्ठ अधिकारी गिरफ्तार
June 15, 2026
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए रिलायंस अनिल अंबानी समूह (RAAJ) के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर (जीएमडी) सतीश सेठ और गौतम भैलाल दोशी को गिरफ्तार किया है. दोनों को 12 जून 2026 को चल रही जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया. ईडी के अनुसार, सतीश सेठ को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और अन्य से जुड़े ईसीआईआर मामले में गिरफ्तार किया गया है, जबकि गौतम भैलाल दोशी को रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और अन्य से जुड़े (ECIR) मामले में हिरासत में लिया गया है. सतीश सेठ लंबे समय से रिलायंस अनिल अंबानी समूह से जुड़े रहे हैं और समूह की कई कंपनियों में महत्वपूर्ण व्यावसायिक एवं वित्तीय निर्णय लेने में उनकी प्रमुख भूमिका रही है.
सतीश सेठ ने समूह की विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर और संबद्ध कंपनियों में निदेशक के रूप में भी कार्य किया है. सतीश सेठ वर्ष 2000 से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में महत्वपूर्ण निदेशक और प्रबंधन पदों पर रहे हैं. गौतम भैलाल दोशी भी लंबे समय से समूह से जुड़े हुए थे. ईडी के अनुसार, वह समूह की कंपनियों में कराधान, वित्तीय योजना, अनुपालन और जोखिम प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी करते थे. वह रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के निदेशक भी रह चुके हैं और समूह की भारत तथा विदेश स्थित कई कंपनियों के बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता भी थे.
ईडी की जांच में सामने आया है कि सतीश सेठ ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा संचालित सड़क निर्माण परियोजनाओं से सार्वजनिक धन के कथित गबन और धन के दुरुपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. गौतम भैलाल दोशी पर आरोप है कि उन्होंने ऐसी कॉर्पोरेट संरचना तैयार करने में अहम भूमिका निभाई, जिसका इस्तेमाल रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड से कथित अपराध की आय को बाहर निकालने के लिए किया गया. गिरफ्तारी के बाद सतीश सेठ को महाराष्ट्र के ग्रेटर बॉम्बे स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से ईडी को उनका ट्रांजिट रिमांड मिला. इसके बाद उन्हें नई दिल्ली की द्वारका स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें छह दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया.
गौतम भैलाल दोशी को नई दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया. अदालत ने उन्हें पांच दिनों की ईडी हिरासत में भेजने का आदेश दिया है. ईडी का कहना है कि मामले में जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस कथित वित्तीय अनियमितता और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जाएगी. फिलहाल एजेंसी दोनों आरोपियों से पूछताछ कर धन के प्रवाह, कॉर्पोरेट लेन-देन और कथित वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है.
